Yearly Archives: 2015

लंदन में जुलाई का महीना खासा सक्रीय और विविधताओं से भरा होता है खासकर स्कूल या कॉलेज जाने वाले बच्चों और उनके अविभावकों के लिए – क्योंकि ब्रिटेन में जुलाई में शिक्षा सत्र की समाप्ति होती है, रिजल्ट आते हैं और फिर जुलाई के आखिरी महीने में गर्मियों की लम्बी छुट्टियां हो जाती हैं.…

  एक पुरानी यूनानी (Greek) पौराणिक कथा है कि जब ईश्वर संसार की रचना कर रहा था तो उसने एक छलनी से मिट्टी छान कर पृथ्वी पर बिखेरी. जब सभी देशों पर अच्छी मिट्टी बिखर गई तो छलनी में बचे पत्थर उसने अपने कंधे के पीछे से फेंक दिए और उनसे…

अपनी सभ्यता, सुरम्यता और जीवंतता के लिए विश्व फलक पर मशहूर लंदन आने वाले पर्यटकों की संख्या किसी काल समय की मुहताज नहीं है. भारत से भी यहाँ वर्ष पर्यन्त पर्यटकों की अच्छी खासी तादाद देखी जा सकती है. हर पर्यटक का किसी स्थान के प्रति अपना नजरिया होता है तो…

  हम पश्चिम की होड़ बेशक करें पर यह सच है कि पश्चिम कहीं से भी कुछ भी अच्छा सीखने और अपनाने में कभी शर्म या कोताही नहीं करता। कुछ भी अपने फायदे का मिले तो उसे खुले हाथों और दिमाग से अपनाना और उसे अपनी जीवन शैली और परिवेश…

पिता माँ से नहीं होतेवह नहीं लगाते चिहुंक कर गलेनहीं उड़ेलते लाड़नहीं छलकाते आँखें पल पलरोके रखते हैं मन का गुबारऔर बनते हैं आरोपीदेने के सिर्फ लेक्चर.पर तत्पर सदा हटाने को  हर कांटा बच्चों के पथ से खड़े वट वृक्ष की तरहदेते छाया कड़ी घूप मेंऔर रहते मौननहीं मांगते क़र्ज़ भीकभी अपने…

वो खाली होती है हमेशा।जब भी सवाल हो,क्या कर रही हो ?जबाब आता हैकुछ भी तो नहींहाँ कुछ भी तो नहीं करती वोबस तड़के उठती है दूध लाने कोफिर बनाती है चायजब सुड़कते हैं बैठके बाकी सबतब वो बुहारती है घर का मंदिरफिर आ जाती है कमला बाईफिर वो कुछ नहीं…

पिछले सप्ताह भारत में सी बी एस सी के बारहवीं के रिजल्ट्स आए और मुख्य मिडिया से लेकर सोशल मीडिया तक काफी गहमा गहमी रही. फोन पर, मेल में हर माध्यम से खुशी की ख़बरें सुनाई दीं.जहाँ तक सुनने में आया ऐसा लगा जैसे ९० % से कम नंबर किसी…

उस शहर से पहली बार नहीं मिल रही थी मैं, बचपन का नाता था. न जाने कितनी बार साक्षात्कार हुआ था. उस स्टेशन से, विधान सभा रोड से और उस एक होटल से. यूँ तब इस शहर से मिलने की वजह पापा के कामकाजी दौरे हुआ करते थे जो उनके…

कोई आपसे कहे कि लंदन की थेम्स से आजकल गंगा – जमना की खुशबू आ रही है तो क्या आप यकीन करेंगे? शायद नहीं, शायद क्या, बिलकुल नहीं करेंगे। क्योंकि ज़माना कितना भी आगे बढ़ गया हो इतना तो अभी नहीं बढ़ा कि नदियों की खुशबू सात समुन्द्र पार मोबाइल…

आज से कुछ वर्ष पूर्व जब इस देश में आना हुआ था तब सड़कों में भारी मात्रा में वाहन होने के बावजूद गज़ब की शांति महसूस हुआ करती थी. कायदे से अपनी -अपनी लेंन में चलतीं, बिना शोरगुल के लेन बदलतीं, ओवेरटेक करती गाडियां मुझे अक्सर आश्चर्य में डाल दिया…