Gazal

जाने किसने छिड़क दिया है तेज़ाब बादलों पर, कि बूंदों से अब तन को ठंडक नहीं मिलती. बरसने को तो बरसती है बरसात…

लरजते होंटों की दुआओं का फन देखेंगे, दिल से निकली हुई आहों का असर देखेंगे, चाहे तू जितना दबा ले मन का तूफान…

रो रो के धो डाले हमने, जितने दिल में अरमान थे।  हम वहाँ घर बसाने चले, जहाँ बस खाली मकान थे।  यूँ तो…

तू समझे न समझे दीवानगी मेरी , तेरे आगोश में मेरे मर्ज़ की दवा रखी है। दिल आजकल कुछ भारी- भारी सा लगता…