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वह जीने लगी है…

वह जीने लगी है…

अब नहीं होती उसकी आँखे नम जब मिलते हैं अपने अब नहीं भीगतीं उसकी पलके देखकर टूटते सपने। अब नहीं छूटती उसकी रुलाई किसी के उल्हानो…'

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एक अंतहीन कथा –

एक अंतहीन कथा –

एक बड़े शहर में एक आलीशान मकान था. ऊंची दीवारें, मजबूत छत, खूबसूरत हवादार कमरे और बड़ी बड़ी खिड़कियाँ जहाँ से ताज़ी हवा आया करती…'

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अपना भविष्य अपने हाथ…

अपना भविष्य अपने हाथ…

“महिला लेखन की चुनौतियाँ और संभावना” महिला लेखन की चुनौतियां - कहाँ से शुरू होती हैं और कहाँ खत्म होंगी कहना बेहद मुश्किल है. एक स्त्री…'

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एक पाती उस पार…

एक पाती उस पार…

पता है; पूरे 18 साल होने को आये. एक पूरी पीढ़ी जवान हो गई. लोग कहते हैं दुनिया बदल गई. पर आपको तो ऊपर से साफ़ नजर आता…'

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नॉस्टाल्जिया…

नॉस्टाल्जिया…

ऐ मुसाफिर सुनो,  वोल्गा* के देश जा रहे हो  मस्कवा* से भी मिलकर आना.  आहिस्ता रखना पाँव  बर्फ ओढ़ी होगी उसने  देखना कहीं ठोकर से…'

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ब्रिक्सिट का कैसा हो क्रिसमस.

ब्रिक्सिट का कैसा हो क्रिसमस.

यूँ देखा जाए तो यह साल  पूरी दुनिया के लिए ही खासा उथल पुथल वाला साल रहा. वहाँ भारत में नोटबंदी हंगामा मचाये रही, उधर अमरीका…'

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