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तुझ पर मैं क्या लिखूं माँ

तुझ पर मैं क्या लिखूं माँ

तुम पर मैं क्या लिखूं माँ,तेरी तुलना के लिएहर शब्द अधूरा लगता हैतेरी ममता के आगेआसमां भी छोटा लगता हैतुम पर मैं क्या लिखूं माँ.…'

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एहसास का असर

एहसास का असर

अहसास तेरी मासूम निगाहों का मेरी सर्द निगाहों से इस कदर मिला कि  सारी क़ायनात पीछे छोड़ कर मैं तेरी नज़रों मे मशगूल हो गया।…'

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पूरब पश्चिम

पूरब पश्चिम

कहीं सुनहरी बदन सेकती, कहीं किसी का बदन जलाती चिलचिलाती धुप कहीं रुपसी करती है डाइटिंग कहीं जान से मारती है भूख. कहीं फ़ैशन है…'

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नारी

नारी

बंद खिड़की के पीछे खड़ी वो, सोच रही थी की खोले पाट खिड़की के, आने दे ताज़ा हवा के झोंके को, छूने दे अपना तन…'

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पापा तुम लौट आओ ना

पापा तुम लौट आओ ना

पापा तुम लौट आओ ना, तुम बिन सूनी मेरी दुनिया, तुम बिन सूना हर मंज़र, तुम बिन सूना घर का आँगन, तुम बिन तन्हा हर…'

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लौट आ

लौट आ

हर सुबह आती है जैसे , रात के जाने के बाद. याद उनकी आती है, उनके खो जाने के बाद. ज़िंदगी की राह में, अक्सर…'

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