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NRI

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सुबह की चाय की प्याली और रफ़ी के बजते गीतों के साथ एक हुड़क आज़ भी दिल में हिलकोरे सी लेती है दिल करता है छोड़…'

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एक क़तरा आसमान

एक क़तरा आसमान

कुछ थे रंगबिरंगे सपने, कुछ मासूम से थे अरमान कुछ खवाबों ने ली अंगड़ाई कुछ थीं अनोखी सी दास्तान फिर चले जगाने इस संमाज को…'

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मेरा देश महान.

मेरा देश महान.

ये कैसा महान देश है मेरा.... कल के कर्णधार ही जहाँ भूखे नंगे फिरते हैं भावी सूत्रधार जहाँ ढाबे पर बर्तन घिसते हैं सृजन करने…'

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तुझ पर मैं क्या लिखूं माँ

तुझ पर मैं क्या लिखूं माँ

तुम पर मैं क्या लिखूं माँ,तेरी तुलना के लिएहर शब्द अधूरा लगता हैतेरी ममता के आगेआसमां भी छोटा लगता हैतुम पर मैं क्या लिखूं माँ.…'

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एहसास का असर

एहसास का असर

अहसास तेरी मासूम निगाहों का मेरी सर्द निगाहों से इस कदर मिला कि  सारी क़ायनात पीछे छोड़ कर मैं तेरी नज़रों मे मशगूल हो गया।…'

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पूरब पश्चिम

पूरब पश्चिम

कहीं सुनहरी बदन सेकती, कहीं किसी का बदन जलाती चिलचिलाती धुप कहीं रुपसी करती है डाइटिंग कहीं जान से मारती है भूख. कहीं फ़ैशन है…'

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