लोकप्रिय प्रविष्टियां

यूँ सुना था तथाकथित अमीर और विकसित देशों में सड़कों पर जानवर नहीं घूमते. उनके लिए अलग दुनिया है. बच्चों को गाय, बकरी, सूअर जैसे पालतू जानवर दिखाने के लिए भी चिड़िया घर ले जाना पड़ता है. और जो वहां ना जा पायें उन्हें शायद पूरी जिन्दगी वे देखने को ना मिले.ये तो हमारा ही देश है जहाँ न  चाहते हुए भी हर…

तुम्हारे उठने और  मेरे गिरने के बीच  बहुत कम फासला था.  बहुत छोटी सी थी ये जमीं  या तो तुम उठ सकते थे  या मै ही,  मैंने  उठने दिया दिया था तुम्हे  अपने कंधो का सहारा देकर  उसमे झुक गए मेरे कंधे  आहत हुआ अंतर्मन  पर ह्रदय प्रफुल्लित था  आत्मा की आवाज़ सुनकर.  पर आज  सबकुछ नागवार सा है,  भूल…

सुबह की चाय की प्याली और रफ़ी के बजते गीतों के साथ एक हुड़क आज़ भी दिल में हिलकोरे सी लेती है दिल करता है छोड़ छाड़ कर ये बेगाना देश और ये लोग ऊड जाएँ इसी पल थाम कर अपनो के प्रेम की कोई डोर। मन पंछी उड़ान भर रहा था उसके अपने ख़यालों में कि हक़ीक़त ने ली अंगड़ाई…

“In my next life I would like to be born an indian” जी नहीं… ये कथन मेरा नहीं ,मुझे तो ये रुतबा हासिल है….यह कथन है एक अंग्रेज़ का ..जी हाँ ठीक सुना आपने वो अंग्रेज़ जिन्हें भारत में कमियां और अपने देश में खूबियाँ ही नजर आती हैं.यह कहना है Sebastian Shakespeare का जो हाल ही में २ हफ्ते…

कहीं सुनहरी बदन सेकती, कहीं किसी का बदन जलाती चिलचिलाती धुप कहीं रुपसी करती है डाइटिंग कहीं जान से मारती है भूख. कहीं फ़ैशन है कम कपड़ों का , कहीं एक ओड़नी को तरसता योवन कहीं  बर्गर ,कोक में डूबा कोई, कहीं कूड़े में वाड़ा पाँव ढूँढता बचपन. वही है धरती अंबर वही है, वही है सूरज, चाँद और तारे…

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