लोकप्रिय प्रविष्टियां

यूँ सुना था तथाकथित अमीर और विकसित देशों में सड़कों पर जानवर नहीं घूमते. उनके लिए अलग दुनिया है. बच्चों को गाय, बकरी, सूअर जैसे पालतू जानवर दिखाने के लिए भी चिड़िया घर ले जाना पड़ता है. और जो वहां ना जा पायें उन्हें शायद पूरी जिन्दगी वे देखने को ना मिले.ये तो हमारा ही देश है जहाँ न  चाहते हुए भी हर…

आसमान के ऊपर भी एक और आसमान है, उछ्लूं लपक के छू लूँ  बस ये ही अरमान है। बना के इंद्रधनुष को अपनी उमंगों का झूला , बैठूँ और जा पहुँचूँ चाँद के घर में सीधा। कुछ तारे तोडूँ और भर लूँ अपनी मुठ्ठी में, लेके सूरज का रंग भर लूँ सपनो की डिब्बी में। उम्मीदों का ले उड़नखटोला जा उतरूं…

प्रेम दिवस कहो या valentine day ..कितना खुबसूरत एहसास है …आज के दौर की इस आपा धापी जिन्दगी में ये एक दिन जैसे ठहराव सा ला देता है .एक दिन के लिए जैसे फिजा ही बदली हुई सी लगती है ..फूलो की बहार सी आ जाती है…हर चेहरा फूल सा खिला दीखता है..कोई गर्व से , कोई ख़ुशी से ,…

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता  कहीं ज़मीं  तो कहीं आसमां  नहीं मिलता . बहुत छोटी थी मैं जब यह ग़ज़ल सुनी थी और शायद पहली यही ग़ज़ल ऐसी थी जो पसंद भी आई और समझ में भी आई। एक एक शेर इतनी गहराई से दिल में उतरता जाता कि आज भी कोई मुझे मेरी पसंदीदा गजलों के बारे में…

जी हाँ,मेरे पास नहीं है  पर्याप्त अनुभव  शायद जो जरुरी  है कुछ लिखने के लिए  नहीं खाई कभी प्याज रोटी पर रख कर  कभीनहीं भरा पानी  पनघट पर जाकर   बैलगाड़ी, ट्रैक्टर, कुआं और बरगद का चबूतरा सब फ़िल्मी बातें हैं मेरे लिए  “चूल्हा” नाम ही सुना है सिर्फ मैंने  और पेड़ पर चढ़ तोड़ना आम  एक एडवेंचर,एक खेल  जो कभी नहीं…

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