लोकप्रिय प्रविष्टियां

वो खाली होती है हमेशा। जब भी सवाल हो,क्या कर रही हो ? जबाब आता है कुछ भी तो नहीं हाँ कुछ भी तो नहीं करती वो बस तड़के उठती है दूध लाने को फिर बनाती है चाय जब सुड़कते हैं बैठके बाकी सब तब वो बुहारती है घर का मंदिर फिर आ जाती है कमला बाई फिर वो कुछ नहीं…

मनुष्य के अस्तित्व में सभ्यताओं का प्रमुख स्थान रहा है और सभ्यताओं में नदियों का। ये ना सिर्फ मानव जीवन के लिए एक आवश्यक तत्व रहीं बल्कि उसके बनाए स्थान, गांव, शहर को सुंदरता प्रदान करने में भी प्रमुख रहीं। नदियों के किनारे बसे हुए गाँव, शहर प्राकृतिक रूप से सुंदर दिखाई देते हैं. यूरोप के शहरों की अतिरिक्त सुंदरता…

काली अँधेरी रात से हो सकता है  डर लगता हो तुमको  मैं तो अब भी स्याह रात में  तेरी याद का दिया जलाती हूँ। ये दिन तो गुजर जाता है  दुनिया के रस्मो रिवाजों में रात के आगोश में अब भी,  मैं गीत तेरे गुनगुनाती हूँ। दिन के शोर शराबे में  सुन नहीं सकता आहें मेरी इसलिए रात के संन्नाटे…

याद है तुम्हें ? उस रात को चांदनी में बैठकर  कितने वादे किये थे  कितनी कसमें खाईं थीं. सुना था, उस ठंडी सी हवा ने  जताई भी थी अपनी असहमति  हटा के शाल मेरे कन्धों से. पर मैंने भींच लिया था उसे  अपने दोनों हाथों से.  नहीं सुनना चाहती थी मैं  कुछ भी  किसी से भी. अब किससे करूँ शिकायत …

जब भी कभी होती थी संवेदनाओं की आंच तीव्र तो उसपर  अंतर्मन की कढाही चढ़ा कलछी से कुछ शब्दों को  हिला हिला कर भावों का हलवा सा  बना लिया करती थी और फिर परोस दिया करती थी अपनों के सम्मुख और वे भी उसे  सराह दिया करते थे शायद  मिठास से  अभिभूत हो कर , पर अब उसी कढाही में …

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