लोकप्रिय प्रविष्टियां

करवा चौथ – ये त्योहार उत्तर भारत में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है.और भई मनाया भी क्यों न जाये आखिर एक महिने पहले से तैयारियाँ जो शुरु हो जाती हैं..शुरुआत होती है धर्मपत्नी के तानो से, कि, देखो जी mrs शर्मा १०,००० कि साड़ी लाई हैं इस बार, सुनो जी पड़ोसन को उसके पति ने नये झुम्के दिलाये हैं…

 http://shikhakriti.blogspot.co.uk/2013/09/blog-post_15.html  यहाँ से आगे।  अब तक यह तो विजया की समझ में आने लगा था कि घर की तीसरी मंजिल पर रहने वाले निखिल के सगे भैया, भाभी क्यों अजनबियों की तरह रहते हैं, क्यों उन्होंने घर में आने जाने का रास्ता भी बाहर से बना लिया है, और क्यों त्योहारों पर भी वह एक दूसरे को विश तक नहीं करते। हालाँकि बात उलटी भी…

आज़ तो लगता है जैसे जहाँ मिल गया, ये ज़मीन मिल गई आसमान मिल गया. हों किसी के लिए ,ना हों मायने इसके, मुझे तो मेरा बस एक मुकाम मिल गया. एक ख्वाब थी ये मंज़िल ,जब राह पर चले थे, एक आस थी ये ख्वाइश जब ,मोड़ पर मुड़े थे, धीरे-धीरे ये एक मुश्किल इम्तहान हो गया, पर आज़…

फिर वही धुँधली राहें, फिर वही तारीक़ चौराहा. जहाँ से चले थे एक मुकाम की तलाश में, एक मंज़िल के एक ख्वाब के गुमान में पर घूम कर सारी गलियाँ आज़, फिर हैं मेरे सामने-  वही गुमनाम राहें , वही अनजान चौराहा. तय कर गये एक लंबा सफ़र, हल कर गये राह की सब मुश्किलातों को, पर आज़ खड़े हैं…

ओरों की पूरी होते देख तमन्ना, हमने भी एक तमन्ना कर ली. ना जाने कितने ख्वाब देख डाले एक ही रात में, की ख्वाब देखने से ही हमने नफ़रत कर ली. खुशनसीब होते हों दुनिया के तम्न्नाई, हमने तो तमन्ना कर के ज़िंदगी बदल कर ली. जहाँ मैं सभी को हक़ है तमन्ना करने का, इस खुशफहमी ने भी आज़…

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