लोकप्रिय प्रविष्टियां

. .यहाँ यूरोप में होलिडेज पर जाने का बहुत रिवाज़ है….जब देखो जिसे देखो होलिडेज पर निकल जाता है …काम का क्या है ? होता रहेगा…रोज़ ही होता है और जहाँ जरा ज्यादा काम का बोझ हुआ कह दिया ..कि हम तो होलिडेज पर जा रहे हैं आकर देखेंगे .यहाँ हर कोई तीन महीने में एक बार एक हफ्ते के…

लो फिर आ गई दिवाली… हम फिर करेंगे घर साफ़ मगर मन तो मेले ही रह जायेंगे . दिल पर चडी रहेगी स्वार्थ की परत पर दीवारों पे रंग नए पुतवायेंगे . फिर सजेंगे बाज़ार मगर जेबें खाली ही रह जाएँगी . जगमगायेंगी रौशनी की लडियां पर इंसानियत अँधेरा ही पायेगी . आस्था से क्या लेना-देना हमें पर लक्ष्मी पूजन…

इंटर नेट नहीं था तो उसका एक फायदा हुआ | दो  बहुत ही बेहतरीन पुस्तकें पढ़ने का मौका मिल गया. एक तो समीर लाल जी की ”  देख लूँ तो चलूँ ” आ गई भारत से कनाडा और फिर यॉर्क होती हुई. दूसरी संगीता जी की ” उजला आस्मां ” आखिर कार दो  महीने भारत में ही यहाँ वहां भटक कर…

बचपन में हम बहनें बहुत लड़ा करती थीं ..सभी भाई बहन का ये जन्म सिद्ध अधिकार है ..और लड़ते हुए गुस्से में एक दूसरे  को ना जाने क्या क्या कह दिया करते थे .तब मम्मी बहुत डाँटती थीं , कि शुभ शुभ बोला करो, ना जाने कौन से वक़्त माँ सरस्वती ज़ुबान पर बैठ जाये , और तीन  बार कुछ…

काली अँधेरी रात से हो सकता है  डर लगता हो तुमको  मैं तो अब भी स्याह रात में  तेरी याद का दिया जलाती हूँ। ये दिन तो गुजर जाता है  दुनिया के रस्मो रिवाजों में रात के आगोश में अब भी,  मैं गीत तेरे गुनगुनाती हूँ। दिन के शोर शराबे में  सुन नहीं सकता आहें मेरी इसलिए रात के संन्नाटे…

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