लोकप्रिय प्रविष्टियां

लंदन में इस साल अब जाकर मौसम कुछ ठंडा हुआ है. वरना साल के इस समय तक तो अच्छी- खासी ठण्ड होने लगती थी, परन्तु इस बार अभी तक हीटिंग ही ऑन नहीं हुई है. ग्लोबल वार्मिग का असर हर जगह पर है. वैसे भी यहाँ के मौसम का कोई भरोसा नहीं।शायद इसलिए   और हम जैसे दो नावों में सवार प्राणी इस…

लन्दन के एक मंदिर में त्यौहारों पर लगती लम्बी भीड़ त्यौहार पर मंदिर में लगती लम्बी भीड़, रंग बिरंगे कपड़े, बाजारों में, स्कूल के कार्यक्रमों में बजते हिंदी फ़िल्मी गीत,बसों पर लगे हिंदी फिल्म और सीरियलों के पोस्टर.और कोने कोने से आती देसी मसालों  की सुगंध .क्या लगता है आपको किसी भारतीय शहर की बात हो रही है.है ना? जी नहीं यहाँ भारत के किसी शहर की नहीं…

जी हाँ …हम बेकार ही विदेशी इवेंट्स मनाने में हंगामा करते हैं ..कि वेलेंटाइन डे. क्रिसमस ..विदेशी त्यौहार है हम नहीं मनाएंगे इनसे हमारी संस्कृति को खतरा है..परन्तु और कुछ हो न हो थोड़ी व्यावहारिकता, और डिप्लोमेसी हमें इन अंग्रेजों से सीख ही लेनी चाहिए..हमसे ,हमारे ही बारे में सब जानकार अपना फायदा कैसे किया जाता है ये गुण बेशक…

जाने किसने छिड़क दिया है तेज़ाब बादलों पर, कि बूंदों से अब तन को ठंडक नहीं मिलती. बरसने को तो बरसती है बरसात अब भी यूँही, पर मिट्टी को अब उससे तरुणाई नहीं मिलती. खो गई है माहौल से सावन की वो नफासत, अब सीने में किसी के वो हिलोर नहीं मिलती. अब न चाँद महकता है, न रात संवरती…

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