लोकप्रिय प्रविष्टियां

एक जंगल था. उसमें तरह तरह के जीव रहते थे. उस पर कुछ कुछ तथाकथित बलशाली जीवों जैसे शेर, चीता, भालू आदि ने कब्जा कर रखा था. जंगल के सभी अच्छे, फलदायक इलाके उन्होंने अपने कब्जे में किये हुए थे. जिनके अन्दर वे सिर्फ अपने ही लोगों को जाने देते. उनके बाहर उन्होंने अपने ही भेड़ियों, सियारों आदि को पहरे…

हथेली की रेखाओं में कभी सीधी कभी आड़ी सी पगडंडी पर लुढ़कती कभी बगीचों में टहलती बारिश बन बरसती कभी धूप में तपती नर्म ओस सी बिछती तो कभी शूल बन चुभती झरने सी झरती कभी नदिया सी बहती रहती मेज पे रखे प्याले से कभी चाय सी छलकती. ग़ज़ल सी कहती कभी कभी गीतों पे थिरकती . रातों के…

देश में आजकल माहौल बेहद राजनीतिक हो चला है. समाचार देख, सुनकर दिमाग का दही हो जाता है.ऐसे में इसे ज़रा हल्का करने के लिए कुछ बातें मन की हो जाएँ. हैं एक रचना लिखने के लिए पहले सौ रचनाएँ पढनी पड़ती हैं।परन्तु कभी कभी कोई एक रचना ही पढ़कर ऐसे भाव विकसित होते हैं मन में, कि रचना में ढलने को…

राष्ट्र मंडल खेल खतरे  में हैं क्यों?  क्योंकि एक जिम्मेदारी भी ठीक से नहीं निभा सकते हम .बड़े संस्कारों की दुहाई देते हैं हम. ” अतिथि देवो भव : का नारा लगाते हैं परन्तु अपने देश में कुछ मेहमानों का ठीक से स्वागत तो दूर उनके लिए सुविधाजनक व्यवस्था भी नहीं कर पाए. इतनी दुर्व्यवस्था  कि  मेहमान भी आने से मना…

क्या चाहा था, बहुत कुछ तो चाहा ना था क्या माँगा था खुदा से, बहुत कुछ तो माँगा ना था. जो मिला ख़ुशनसीबी थी पर थी, गम के आँचल से लिपटी, लगा बिन मांगे मोती मिला, पर था नक़ली वो मालूम ना था. हर सुख मिला पर था आँसुओं की आड़ में, हर फूल मिला पर था काटों के साथ…

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