लोकप्रिय प्रविष्टियां

मॉस्को  स्टेट यूनिवर्सिटी  अभी तक आपने पढ़ा कि कैसे हमारा वेरोनिश से मॉस्को  जाना तय हो गया था और हम हंसी ख़ुशी तैयारियों  में लग गये थे कि चलो अब कम से  कम इंडिया की  टिकट के लिए मॉस्को  के चक्कर लगाना  तो बचेगा..पर नहीं जी अगर इतना आसान सब हो जाये तो भगवान को पूछेगा ही कौन ? असली तूफान आना…

अरुणा सब्बरवाल जी का नया कहानी संग्रह जब हाथ में आया तो सबसे पहले ध्यान आकर्षित किया उसके शीर्षक ‘उडारी’ ने ।जैसे हाथ में आते ही पंख फैलाने को तैयार. लगा कि अवश्य ही यथार्थ के आकाश पर कल्पना की उड़ान लेती कहानियाँ होंगी और वाकई पहली ही कहानी ने मेरी सोच को सच साबित कर दिया । संग्रह के…

अब नहीं होती उसकी आँखे नम जब मिलते हैं अपने अब नहीं भीगतीं उसकी पलके देखकर टूटते सपने। अब नहीं छूटती उसकी रुलाई किसी के उल्हानो से अब नहीं मरती उसकी भूख किसी के भी तानो से। अब किसी की चढ़ी तौयोरियों से नहीं घुटता मन उसका अब किसी की उपेक्षाओं से नहीं घुलता तन उसका । अब नम होने से…

जैसा कि आपने जाना कि अब जीविकोपार्जन  के लिए हमने एक छोटी सी कंपनी में ऑफिस  एडमिनिस्ट्रेटर /इन्टरप्रेटर की नौकरी कर ली थी .क्योंकि अब  क्लासेज़ में जाना उतना जरुरी नहीं रह गया था.अब बारी थी स्वध्ययन  की , अब तक जो भी पढ़ाया गया है उन सब को समझने की , समीक्षा करने की, पढाई हुई जानकारी का उपयोग करने…

बंद खिड़की के पीछे खड़ी वो, सोच रही थी की खोले पाट खिड़की के, आने दे ताज़ा हवा के झोंके को, छूने दे अपना तन सुनहरी धूप को. उसे भी हक़ है इस आसमान की ऊँचाइयों को नापने का, खुली राहों में अपने , अस्तित्व की राह तलाशने का, वो भी कर सकती है अपने, माँ -बाप के अरमानो को…

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