लोकप्रिय प्रविष्टियां

प्रिय बेटियों, पूरी आशा है तुम वहाँ कुशल पूर्वक होगी। हम यहाँ ठीक हैं। तुम्हारी मम्मी भी आ गईं हैं। वह भी ठीक हैं। हम रोज चाय के समय तुम लोगों को याद करते हैं। मम्मी तुम लोगों के समाचार देती हैं। उनकी बातें खत्म ही नहीं होतीं। ऐसा लगता है न जाने कब से नहीं बोलीं हैं। यह जगह…

बरगद की छाँव सा  शहरों में गाँव सा  भंवर में नाव सा  कोई और नहीं होता।  फूलों में गुलाब सा  रागों में मल्हार सा  गर्मी में फुहार सा  कोई और नहीं होता।  नारियल के फल सा  करेले के रस सा  खेतों में हल सा  कोई और नहीं होता। पूनम की निशा सा  पथ में दिशा सा  जीवन में “पिता” सा  कोई…

क्यों घिर जाता है आदमी, अनचाहे- अनजाने से घेरों में, क्यों नही चाह कर भी निकल पाता , इन झमेलों से ? क्यों नही होता आगाज़ किसी अंजाम का ,क्यों हर अंजाम के लिए नहीं होता तैयार पहले से? ख़ुद से ही शायद दूर होता है हर कोई यहाँ, इसलिए आईने में ख़ुद को पहचानना चाहता है, पर जो दिखाता…

चॉकलेट,मिठाई  आलिंगन, चुम्बन. गुलाब और टैडी  सारे पड़ावों से गुजर  आखिर में  प्रेम का नंबर आ ही गया  सुना है आज प्रेम दिवस है. ************* रीत कुछ हम भी निभा लें, कुछ लाल तुम पहन लो  कुछ लाल मैं भी पहन लूं  चलो हाथ में हाथ डाल  कुछ दूर यूँ ही टहल आयें कमबख्त लाल फूल भी आज  बहुत महंगे हैं. *******************  खाली बगीचे से मन …

भाव अर्पित,राग अर्पित  शब्दों का मिजाज अर्पित  छंद, मुक्त, सब गान अर्पित  और तुझे क्या मैं अर्पण करूं। नाम अर्पित, मान अर्पित  रिश्तों का अधिकार अर्पित  रुचियाँ, खेल तमाम अर्पित  और तुझे क्या मैं अर्पण करूँ  शाम अर्पित,रात अर्पित  तारों की बारात अर्पित  आधे अधूरे ख्वाब अर्पित  और तुझे क्या मैं अर्पण करूँ। रूह अर्पित, जान अर्पित  जिस्म में चलती सांस अर्पित  कर दिए सारे अरमान अर्पित  अब और…

वीडियो