लोकप्रिय प्रविष्टियां

हमारे देश में सैक्स और संस्कृति दो शब्द ऐसे हैं जिन पर जब चाहे हंगामा करा लो. एक जुबान से निकला नहीं कि हंगामा और दूसरा न निकले तो हंगामा। हमें बच्चों के सामने सैक्स से सम्बंधित माँ बहन की गाली देने से परहेज नहीं है, खजुराहो, कोणार्क की मूर्ति कला देखने- दिखाने से परहेज नहीं है परन्तु बच्चों को उनके…

 दिल्ली पुस्तक मेले का परिसर, खान पान में व्यस्त जनता। किसी भी मेले का अर्थ मेरे लिए होता है, कि वहां वह सब वस्तुएं देखने, खरीदने को मिलें जो आम तौर पर बाजारों और दुकानों में उपलब्ध नहीं होतीं। और यही उत्सुकता मुझे पिछले महीने के,भारत में प्रवास के आखिरी दिन की व्यस्तता के बीच भी दिल्ली पुस्तक मेले में खींच ले…

“बिहार की एक ट्रेन में, बोतल से पानी पी लेने पर एक युवक की कुछ लोगों ने जम कर पिटाई कर दी” सोशल मीडिया पर छाई इस एक खबर ने मुझे न जाने कितनी ही बातें याद दिला दीं जिन्हें मैं इस मुगालते में भुला चुकी थी कि अब तो बहुत समय बीत गया। हालात सुधर गए होंगें।  पर क्या…

कुछ कहते हैं शब्दों के पाँव होते हैं  वे चल कर पहुँच सकते हैं कहीं भी  दिल तक, दिमाग तक,जंग के मैदान तक.  कुछ ने कहा शब्दों के दांत होते हैं  काटते हैं, दे सकते हैं घाव, पहुंचा सकते हैं पीड़ा।  मेरे ख़याल से तो शब्द रखते हैं सिर्फ  अपने रूढ़ अर्थ  कब, कहाँ, कैसे,कहे, लिखे, सुने  गए   यह कहने सुनने वाले की नियत पर है निर्भर कोई भी शब्द अच्छा या…

भाव अर्पित,राग अर्पित  शब्दों का मिजाज अर्पित  छंद, मुक्त, सब गान अर्पित  और तुझे क्या मैं अर्पण करूं। नाम अर्पित, मान अर्पित  रिश्तों का अधिकार अर्पित  रुचियाँ, खेल तमाम अर्पित  और तुझे क्या मैं अर्पण करूँ  शाम अर्पित,रात अर्पित  तारों की बारात अर्पित  आधे अधूरे ख्वाब अर्पित  और तुझे क्या मैं अर्पण करूँ। रूह अर्पित, जान अर्पित  जिस्म में चलती सांस अर्पित  कर दिए सारे अरमान अर्पित  अब और…

वीडियो