लोकप्रिय प्रविष्टियां

बचपन में हम बहनें बहुत लड़ा करती थीं ..सभी भाई बहन का ये जन्म सिद्ध अधिकार है ..और लड़ते हुए गुस्से में एक दूसरे  को ना जाने क्या क्या कह दिया करते थे .तब मम्मी बहुत डाँटती थीं , कि शुभ शुभ बोला करो, ना जाने कौन से वक़्त माँ सरस्वती ज़ुबान पर बैठ जाये , और तीन  बार कुछ…

एक नौनिहाल माँ का एक खिड़की से झाँक रहा था साथ थाल में पड़ी थी रोटी  चाँद अस्मां का मांग रहा था माँ ले कर एक कौर रोटी का उसकी मिन्नत करती थी लाके देंगे पापा शाम को उससे वादा करती थी पास खड़ा एक मासूम सा बच्चा  उसको जाने कब से निहार रहा था. हैरान था उनकी बातों पर…

{New Observer Post Hindi Daily 28th nov.2009 (online edition )में प्रकाशित.} एक जमाना था जब पत्रमित्रता जोरों पर थी.देश विदेश में मित्र बनाये जाते थे, उसे ज्ञान बाँटने का और पाने का एक जरिया तो समझा ही जाता था, बहुत से तथाकथित रिश्ते भी बन जाया करते थे।और कभी कभी ब्लेक मैलिंग का सामान भी . आज यही काम इंटर…

तीन मध्यम वर्गीय १६- १७ वर्षीय  बालाएं आधुनिक पश्चिमी पोशाक , एक हाथ में स्टाइलिस्ट बैग्स और दूसरे में ब्लेक बेरी.इस काले बेरी  ने बाकी सभी मोबाइल को छुट्टी पर भेज दिया है आजकल. स्थान -महानगर की मेट्रो . शायद किसी कोचिंग क्लास में जा रहीं थीं या फिर आ रहीं थीं.पर उनकी बातों में कहीं भी लेश मात्र भी…

कितना आसान होता था ना जिन्दगी को जीना जब जन्म लेती थी कन्या लक्ष्मी बन कर होता था बस कुछ सजना संवारना सखियों संग खिलखिलाना, कुछ पकवान बनाना और डोली चढ़ ससुराल चले जाना बस सीधी सच्ची सी थी जिन्दगी अब बदल क्या गया परिवेश बोझिल होता जा रहा है जीवन जो था दाइत्व वो तो रहा ही बहुत कुछ…

वीडियो