लोकप्रिय प्रविष्टियां

प्रकृति अपना संतुलन खुद बना लेती है. कितने संकेत दिए उसने, ग्लोबल वॉर्मिंग, पानी की कमी, सुनामी, भूकम्पों द्वारा कि रुक जाओ , संभल जाओ, वर्ना सब ख़त्म हो जायेगा. पर नहीं … हम मनु की संताने अपने आप को किसी ईश्वर से कम नहीं समझतीं. हम हर समस्या का हल निकाल लेंगे. दिमाग पाया है हमने ऐसा. कितना ज्यादा हो गया…

नादान आँखें. बडीं मनचली हैं  तुम्हारी ये नादान आँखें  जरा मूँदी नहीं कि  झट कोई नया सपना देख लेंगी.  इनका तो कुछ नहीं जाता  हमें जुट जाना पड़ता है  उनकी तामील में  करना पड़ता है ओवर टाइम .  अपने दिल और दिमाग की  इस शिकायत पर  आज रात खुली आँखों मे गुजार दी है मैने.  न नौ मन तेल होगा न राधा…

पिछले दिनों एक समाचारपत्र में एक खबर थी कि एक २ साल की बच्ची को उसके नाना नानी से लेकर अनाथ आश्रम में पहुंचा दिया गया. क्योंकि नाना नानी को कोर्ट ने बच्ची की देखभाल के लिए उपयुक्त आयु से अधिक पाया। बच्ची की माँ नशे की आदी है और मानसिक रूप से किसी बच्चे को पालने में असमर्थ है इसलिए बच्ची…

लो फिर आ गया वह दिन. अब तो आदत सी बन गई है इस दिन लिखने की. बेशक पूरा साल कुछ न लिखा जाए पर यह दिन कुछ न कुछ लिखा ही ले जाता है. आप का ही असर है सब. मुझे याद है स्कूल में एक भाषण प्रतियोगिता थी. मैंने पहली बार अपनी टीचर के उकसाने पर भाग ले…

पिछले कुछ दिनों बहुत भागा दौड़ी में बीते .२४ जून से २६ जून तक बर्मिघम  के एस्टन यूनिवर्सिटी में कुछ स्थानीय संस्थाओं और भारतीय उच्चायोग के सहयोग से तीन दिवसीय “यू के विराट क्षेत्रीय हिंदी सम्मलेन २०११” था .और हमारे लिए आयोजकों से फरमान आ गया था कि आपको भी चलना है और वहाँ अपना पेपर  पढना भी है. अब क्या बोलना…

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