लोकप्रिय प्रविष्टियां

कुछ थे रंगबिरंगे सपने, कुछ मासूम से थे अरमान कुछ खवाबों ने ली अंगड़ाई कुछ थीं अनोखी सी दास्तान फिर चले जगाने इस संमाज को मिले हाथ से कुछ और हाथ बढ़ चले कदम कुछ यूँ पाने को अपने हिस्से का एक कतरा आसमान…… तपती धूप में नीमछांव सा, निर्जन वन में प्रीत गान सा स्वाती नक्षत्र की एक बूँद के…

क्या चाहा था, बहुत कुछ तो चाहा ना था क्या माँगा था खुदा से, बहुत कुछ तो माँगा ना था. जो मिला ख़ुशनसीबी थी पर थी, गम के आँचल से लिपटी, लगा बिन मांगे मोती मिला, पर था नक़ली वो मालूम ना था. हर सुख मिला पर था आँसुओं की आड़ में, हर फूल मिला पर था काटों के साथ…

वह बृहस्पतिवार का दिन था – तारीख 23 जून 2016  – जब एक जनमत संग्रह के लिए मतदान किया जाने वाला था. इसमें वोटिंग के लिए सही उम्र के लगभग सभी लोग वोट कर सकते थे वे फैसला लेने वाले थे कि यूके को  योरोपीय संघ का सदस्य बना रहना चाहिए या उसे छोड़ देना चाहिए.  इस जनमत संग्रह में…

 रूस के गोर्की टाउन से कर इंग्लैण्ड के स्टार्ट फोर्ड अपोन अवोन तक और मास्को के पुश्किन हाउस  से लेकर लन्दन के कीट्स हाउस तक। ज़ब जब किसी लेखक या शायर का घर , गाँव सुन्दरतम तरीके से संरक्षित देखा हर बार मन में एक  हूक उठी कि काश ऐसा ही कुछ हमारे देश में भी होता। काश लुम्बनी को भी एक यादगार…

कुछ कहते हैं शब्दों के पाँव होते हैं  वे चल कर पहुँच सकते हैं कहीं भी  दिल तक, दिमाग तक,जंग के मैदान तक.  कुछ ने कहा शब्दों के दांत होते हैं  काटते हैं, दे सकते हैं घाव, पहुंचा सकते हैं पीड़ा।  मेरे ख़याल से तो शब्द रखते हैं सिर्फ  अपने रूढ़ अर्थ  कब, कहाँ, कैसे,कहे, लिखे, सुने  गए   यह कहने सुनने वाले की नियत पर है निर्भर कोई भी शब्द अच्छा या…

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