एक ज्योतिषी ने एक बार कहा थाउसे वह मिलेगा सबजो भी वह चाहेगी दिल सेउसने मांगापिता की सेहत,पति की तरक्की,बेटे की नौकरी,बेटी का ब्याह,एक अदद छत.अब उसी छत पर अकेली खड़ीसोचती है वोक्या मिला उसे ?ये पंडित भी कितना झूठ बोलते हैं. ************************ चाहते हैं हम कि बन जाएँ रिश्ते  जरा से प्रयास से  थोड़ी सी गर्मी से  और थोड़े से…

सफलता पाना  आसान है पर उसे उसी स्तर पर बनाये रखना मुश्किल. शायद आप लोगों ने भी सुन रखा होगा. कुछ लोग मानते होंगे और कुछ लोग नहीं. परन्तु मैं हमेशा  ही इस विचार से १००% सहमत रही हूँ. अपने आसपास ,या दूर- दूर न जाने कितने ही ऐसे उदाहरण मुझे मिल जाते हैं जिन्हें  देख कर इस विचार की सत्यता…

मैंने अलगनी पर टांग दीं हैं  अपनी कुछ उदासियाँ  वो उदासियाँ  जो गाहे बगाहे लिपट जाती हैं मुझसे  बिना किसी बात के ही  और फिर जकड लेती हैं इस कदर  कि छुड़ाए नहीं छूटतीं  ये यादों की, ख़्वाबों की  मिटटी की खुश्बू की उदासियाँ  वो बथुआ के परांठों पर  गुड़ रख सूंघने की उदासियाँ  और खेत की गीली मिटटी पर बने  स्टापू की…

अरुणा सब्बरवाल जी का नया कहानी संग्रह जब हाथ में आया तो सबसे पहले ध्यान आकर्षित किया उसके शीर्षक ‘उडारी’ ने ।जैसे हाथ में आते ही पंख फैलाने को तैयार. लगा कि अवश्य ही यथार्थ के आकाश पर कल्पना की उड़ान लेती कहानियाँ होंगी और वाकई पहली ही कहानी ने मेरी सोच को सच साबित कर दिया । संग्रह के…

होली के सच्चे रंग नही अब यहाँ खून की है बोछर दीवाली पर फूल अनार नही अब मानव बम की गूँजे आवाज़ ईद पर गले मिलते नही क्यों गले काटते हैं अब लोग क्रिसमस पर अब पेड़ नही लाशों का ढेर सजाते हैं क्यों लोग हो लोडी,ओडम या तीज़,बैशाखी अब बजते हैं बस द्वेष राग सस्ती राज़नीति मैं बिक गये…