लोकप्रिय प्रविष्टियां

विज्ञान कभी भी अपने दिमाग के दरवाजे बंद नहीं करता। बेशक वह दिल की न सुनता हो परंतु किसी भी अप्रत्याशित, असंभव या बेबकूफाना लगने वाली बात पर भी उसकी संभावनाओं की खिड़की बन्द नहीं होती। यही कारण है कि आज हम बिजली का बल्ब, हवाई जहाज या टेलीफोन जैसी सुविधाओं का सहजता से उपयोग करते हैं जिनकी इनके अविष्कार…

आजकल हर जगह अन्ना की हवा चल रही है .बहुत कुछ उड़ता उड़ता यहाँ वहां छिटक रहा है.ऐसे में मेरे ख़याल भी जाने कहाँ कहाँ उड़ गए .और कहाँ कहाँ छिटक गए…. क्षणिकाएं …….. अपनी जिंदगी की  सड़क के  किनारों पर देखो  मेरी जिंदगी के  सफ़े बिखरे हुए पड़े हैं है परेशान  महताब औ  आफताब ये  शब्बे सहर भी  मेरे तेरे…

तेरी नजरों में अपने ख्वाब समा मैं यूँ खुश हूँबर्फ के सीने में फ़ना हो ज्यूँ ओस चमकती है.  अब बस तू है, तेरी नजर है, तेरा ही नजरिया  मैं चांदनी हूँ जो चाँद की बाँहों में दमकती है.    तेरी सांसों से जो आती है वह खुशबू है मेरी  रात की रानी तो तिमिर के संग ही महकती है.  बेशक फूलों से भरे हों बाग़…

सामान्यत: मैं धर्म से जुड़े किसी भी मुद्दे पर लिखने से बचती हूँ। क्योंकि धर्म का मतलब सिर्फ और सिर्फ साम्प्रदायिकता फैलाना ही रह गया है। या फिर उसके नाम पर बे वजह एक धर्म को बेचारा बनाकर वोट कमाना या फिर खुद को धर्म निरपेक्ष साबित करना। परन्तु आजकल जिस तरह मीडिया में हिन्दू मुस्लिम राग चला हुआ है मुझे कुछ अनुभव…

अपनी कोठरी के छोटे से झरोखे से देखती हूँ दूर, बहुत दूर तक जाते हुए उन रास्तों को. पक्की कंक्रीट की बनी साफ़ सुथरी सड़कें खुद ही फिसलती जातीं सी क्षितिज तक जैसे और उन पर रेले से चलते जा रहे लोग अनगिनत, सजीले, होनहार,महान लोग. मैं भी चाहती हूँ चलना इसी सड़क पर और चाहती हूँ पहुंचना उस क्षितिज…

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