लोकप्रिय प्रविष्टियां

जब से देश छूटा हिंदी साहित्य से भी संपर्क लगभग छूट गया और उसकी जगह (उस समय तो मजबूरीवश) रूसी, ग्रीक, स्पेनिश,अंग्रेजी आदि साहित्य ने ले ली. कभी कभार कुछ हिंदी की पुस्तकें उपलब्ध होतीं तो पढ़ ली जातीं। कई बार बहुत कोशिशें करके कुछ समकालीन हिंदी साहित्य खरीदा भी जिनमें कई तथाकथित चर्चित पुस्तकें भी शामिल थीं. परन्तु उनमें से बहुत…

रो रो के धो डाले हमने, जितने दिल में अरमान थे।  हम वहाँ घर बसाने चले, जहाँ बस खाली मकान थे।  यूँ तो दिल लगाने की, हमारी भी थी आरज़ू,  ढूँढा प्यार का कुआँ वहाँ, जहाँ लंबे रेगिस्तान थे।  हम तो यूँ ही बेठे थे तसव्वुर में किसी के, बिखरे टूट के शीशे की तरह कितने हम नादान थे।  एक…

रद्दी पन्ना – सफ़ेद कोरे पन्ने सी थी मैं  जिस पर जैसी चाहे  इबारत लिख सकते थे तुम पर तुमने भी चुनी काली स्याही  यह सोच कर कि उसी से चमकेगा पन्ना  पर भूल गए तुम  उन काले शब्दों को उकेरना होता है  बेहद एहतियात से  तनिक स्याही बिखरी नहीं कि   शब्द बदल जाते हैं धब्बों में और फिर वह…

काश तुम -तुम ना होते, काश हम – हम ना होते. जब ये ठंडी हवा , गालों को छूकर बालों को उड़ा जाती, जब मुलायम ओस पर सुनहरी धूप पड़ जाती काश उस गीली ओस पर तब हम, तुम्हारा हाथ थामे चल पाते. जब कोई अश्क चुपके से, इन आँखों से लुढ़कने लगता, ये दिल किसी की याद में चुपके…

सामने मेज पर  क्रिस्टल के कटोरे में रखीं  गुलाब की सूखी पंखुड़ियाँ  एक बड़ा कप काली कॉफी  और पल पल गहराती यह रात अजीब सा हाल है.  शब्द अंगड़ाई ले,  उठने को बेताब हैं  और पलकें झुकी जा रही हैं. *************** अरे बरसना है तो ज़रा खुल के बरसो किसी के सच्चे प्यार की तरह ये क्या बूँद बूँद बरसते हो…

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