लोकप्रिय प्रविष्टियां

क्रेमलिन – वर्ल्ड हेरिटेज साईट में शुमार. घर की मुर्गी दाल बराबर .बस यही होता है. जो चीज़ हमें सहजता से सुलभ हो जाये उसकी कदर ही कहाँ करते हैं  हम. और यही कारण होता है कि जिस जगह हम रहते हैं वहां के दर्शनीय स्थलों के प्रति उदासीन से रहते हैं .अरे  यहीं तो हैं कभी भी देख आयेंगे,…

तू शिव है मैं शक्ति नहीं तू सत्य है मैं असत्य सही तू सुन्दर है मैं असुंदर वही पर कुछ है जो भीतर है गुनता है पर दिखता नहीं तूने कभी पूछा नहीं मैंने भी तो कहा नहीं कदाचित प्रेम है तभी तुलता नहीं।…

  हम गुजरे तो खुली गली, तँग औ तारीक़ में बदल गयी इस कदर बदलीं राहें कि, मंजिल ही बदल गई . शाम को करने लगे जब, रोशन सुबहों का हिसाब. जोड़ तोड़ कर पता लगा कि असल बही ही बदल गई. झक दीवारों पर बनाए, स्याही से जो चील -बिलाव देखा पलट जो इक नजर वो इमारत ही बदल…

आत्मा से जहन तक का, रास्ता नसाज है या भावनाओं का ही कुछ, पड़ गया आकाल है दिल के सृजनात्मक भाग में आज़कल हड़ताल है। हाथ उठते हैं मगर शब्द रचते ही नहीं होंट फड़कते हैं मगर बोल फूटते ही नहीं पन्नों से अक्षर का रिश्ता लग रहा दुश्वार है दिल के सृजनात्मक भाग में चल रही हड़ताल है  चल रहीं…

 . हिंदी समिति के २० वर्ष पूरे होने के उपलक्ष  में वातायन,हिंदी समिति और गीतांजलि संघ द्वारा दिनांक ११,१२,और १३ मार्च को क्रमश: बर्मिंघम ,नॉटिंघम और लन्दन में  अन्तराष्ट्रीय हिंदी सम्मलेन आयोजित किया गया. जिसका मुख्य विषय था विदेश में हिंदी शिक्षण और इस सम्मलेन में भारत सहित यू के  और रशिया के  बहुत से हिंदी विद्वानों  ने भाग लिया जिनमें अजय गुप्त,…

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