मन की राहों की दुश्वारियां निर्भर होती हैं उसकी अपनी ही दिशा पर और यह दिशाएं भी हम -तुम निर्धारित नहीं करते ये तो होती हैं संभावनाओं की गुलाम ये संभावनाएं भी बनती हैं स्वयं देख कर हालातों का रुख मुड़ जाती हैं दृष्टिगत राहों पे कुछ भी तो नहीं होता हमारे अपने हाथों में फिर क्यों कहते हैं कि आपकी जीवन रेखाएं …







