लोकप्रिय प्रविष्टियां

हमारे देश में ९० % लोग अपनी आजीविका से संतुष्ट नहीं हैं, उनकी क्षमता और कौशल कुछ और होते हैं, वह कोशिश व काम किसी और के लिए करते हैं और बन कुछ और ही जाते हैं. नतीजा यह होता है कि वे अपने काम से झुंझलाए रहते हैं और इस मजबूरी में अपनाये अपने आजीविका के साधन के लिए किसी न किसी…

आह… ऑटम ऑटम ऑटम… आ ही गया आखिर। इस बार थोड़ा देर से आया। सितम्बर से नवम्बर तक होने वाला ऑटम अब अक्टूबर में ठीक से आना शुरू हुआ है. सब छुट्टी के मूड में थे तो उसने भी ले लीं कुछ ज्यादा। अब आया है तो बादल, बरसात को भी ले आया है और तींनो मिलकर  छुट्टियों की भरपाई ओवर टाइम…

अभी हाल ही में स्थानीय समाचार पत्र में एक समाचार आया कि एक दंपत्ति ने अपने बच्चे का एक स्कूल में रजिस्ट्रेशन  उसके पैदा होने से पहले ही करा दिया .क्योंकि उन्हें डर था कि समय पर उन्हें उनके इलाके का और उनकी पसंद का स्कूल नहीं मिलेगा और वो अपनी पसंद के प्रतिकूल  स्कूल में बच्चे को भेजने के…

यहाँ आजकल बर्फ पढ़ रही है तो उसे देखकर कुछ ख्याल आये ज़हन में view from my house window . छोटे छोटे रुई के से टुकड़े गिरते हैं धुंधले आकाश से और बिछ जाते हैं धरा पर सफ़ेद कोमल चादर की तरह तेरा प्यार भी तो ऐसा ही है, बरसता है बर्फ के फाहों सा और फिर …… बस जाता है…

आज निकली है धूप  बहुत अरसे बाद  सोचती हूँ  निकलूँ बाहर  समेट लूं जल्दी जल्दी  कर लूं कोटा पूरा  मन के विटामिन डी का  इससे पहले कि  फिर पलट आयें बादल  और ढक लें  मेरी उम्मीदों के सूरज को. ******** यूँ धुंधलका शाम का भी बुरा नहीं  सिमटी होती है उसमें भी  लालिमा दिन भर की  जिसे ओढ़कर सो जाता…

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