लोकप्रिय प्रविष्टियां

खुशनुमा सी एक शाम को यूं ही बैठे, मन पर पड़ी मैली चादर जो झाड़ी तो, गिर पड़े कुछ मुरझाये वो स्वप्नफूल, बरसों पहले दिल में दबा दिया था जिनको. पर जैसे दिल में कहीं कोई सुराग था, की हौले हौले सांस ले रहे थे सपने, पा कर आज अंशभर ऊष्मा ली अंगडाई, उमंग खिलने की फिर से जाग उठी…

जैसा कि आपने जाना कि अब जीविकोपार्जन  के लिए हमने एक छोटी सी कंपनी में ऑफिस  एडमिनिस्ट्रेटर /इन्टरप्रेटर की नौकरी कर ली थी .क्योंकि अब  क्लासेज़ में जाना उतना जरुरी नहीं रह गया था.अब बारी थी स्वध्ययन  की , अब तक जो भी पढ़ाया गया है उन सब को समझने की , समीक्षा करने की, पढाई हुई जानकारी का उपयोग करने…

मैं नहीं चाहती लिखूं वो पल  तैरते हैं जो  आँखों के दरिया में  थम गए हैं जो  माथे पे पड़ी लकीरों के बीच  लरजते हैं जो हर उठते रुकते कदम पर  हाँ नहीं चाहती मैं उन्हें लिखना क्योंकि लिखने से पहले  जीना होगा उन पलों को फिर से  उखाड़ना होगा गड़े मुर्दों को  कुरेदने होंगे कुछ पपड़ी जमे ज़ख्म  और फिर उनकी दुर्गन्ध …

चॉकलेट,मिठाई  आलिंगन, चुम्बन. गुलाब और टैडी  सारे पड़ावों से गुजर  आखिर में  प्रेम का नंबर आ ही गया  सुना है आज प्रेम दिवस है. ************* रीत कुछ हम भी निभा लें, कुछ लाल तुम पहन लो  कुछ लाल मैं भी पहन लूं  चलो हाथ में हाथ डाल  कुछ दूर यूँ ही टहल आयें कमबख्त लाल फूल भी आज  बहुत महंगे हैं. *******************  खाली बगीचे से मन …

जीवन में छोटी छोटी  खुशियाँ कितनी मायने रखती हैं इसे किसी को समझना हो तो उसके जीने के ढंग से समझा जा सकता था। कोई भी हालात हो या समस्या अगर उसका हल चाहिए तो बैठकर रोने या अपनी किस्मत को कोसने से तो कतई नहीं निकल सकता । हाँ ऐसे समय में सकारात्मकता से सोचा जाये तो जरूर कुछ…

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