लोकप्रिय प्रविष्टियां

“The Archies”- हुआ यह कि कुछ अमीर बच्चों ने जिद करी कि उन्हें इस क्रिसमस पर गिफ्ट में फिल्म चाहिए. तो उनके घरवाले गए एक बड़ी और सुन्दर दूकान पर और दुकानदार को बोला कि इन बच्चों को इनकी पसंद का गिफ्ट दे दे. पैसे की चिंता न करे. अब उस दुकानदार के पास उन बच्चों के लायक कोई चीज…

मैं नहीं चाहती लिखूं वो पल  तैरते हैं जो  आँखों के दरिया में  थम गए हैं जो  माथे पे पड़ी लकीरों के बीच  लरजते हैं जो हर उठते रुकते कदम पर  हाँ नहीं चाहती मैं उन्हें लिखना क्योंकि लिखने से पहले  जीना होगा उन पलों को फिर से  उखाड़ना होगा गड़े मुर्दों को  कुरेदने होंगे कुछ पपड़ी जमे ज़ख्म  और फिर उनकी दुर्गन्ध …

विशुद्ध साहित्य हमारा कुछ  उस एलिट खेल की तरह हैजिसमें कुछ  सुसज्जित लोग खेलते हैं अपने ही खेमे में बजाते हैं तालीएक दूसरे  के लिए ही पीछे चलते हैं कुछ  अर्दली थामे उनके खेल का सामान इस उम्मीद से शायद  कि इन महानुभावों की बदौलत उन्हें भी मौका मिल जायेगा कभी एक – आध  शॉट  मारने  का और वह  कह सकेंगे  हाँ वासी हैं वे भी उस  तथाकथित  पॉश  दुनिया के  जिसका — बाहरी दुनिया…

हवा हुए वे दिन जब बच्चे की तंदरुस्ती  से घर की सम्पन्नता को परखा जाता था. माताएं अपने बच्चे की बलाएँ ले ले नहीं थकती थीं कि  मेरा बच्चा खाते पीते घर का लगता है. एक वक़्त एक रोटी  कम खाई तो चिंता में घुल घुल कर बडबडाया  करती थीं ..हाय मेरे लाल ने आज कुछ नहीं खाया शायद तबियत ठीक नहीं है. नानी दादी से जब भी बच्चा…

यूके हिंदी समिति की स्थापना 1990 में हुई थी और इसने साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में 35 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इसका हिंदी परीक्षा प्रतियोगिताओं का शैक्षणिक कार्यक्रम 25 वर्ष पहले शुरू हुआ था, इसलिए 6 सितंबर 2025 को इसे मनाने का समय आ गया। इस दिन की शुरुआत इसके संस्थापक पद्मेश गुप्त, सुप्रसिद्ध लेखिका और पत्रकार शिखा…

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