सर उठा रहा भुजंग है क्रोध, रोष, दंभ है बेबस है लाल भूमि के शत्रु हो रहा दबंग है फलफूल रहा आतंक है और सो रहा मनुष्य है अपनी ही माँ की छाती पर वो उड़ेल रहा रक्त है जिन चक्षु में था नेह भरा वो पीड़ा से आज बंद हैं माँ कहे मुझे नहीं देखना मेरी कोख पर लगा…
आज भी, जब भी विदेशी मीडिया में हिन्दुस्तान का जिक्र होता है तो उसमें सांप भालू का नाच दिखाते लोग, मूर्तियों को दूध पिलाते लोग दिखाए जाते हैं, भारत को किस्से कहानियों का, तमाशबीनों का देश समझा जाता है जिसके नागरिक किवदंतियों और चमत्कारिक कहानियों को अपना इतिहास बताते हैं. जी हाँ, बरसों से सुनते आये हैं कि हम भारतीय बेबकूफ…







