कुछ लोग जब बन जाते हैं बड़े तो बढ़ता है उनका पद पर नहीं बढ़ता उनका कद। वे रह जाते हैं छोटे, मन, वचन और कर्म से। उड़ते हुए हवा में छोड़ देते हैं जमीं और लगा देते हैं ठोकर जमीं से जुड़े हुए लोगों को। उड़ा देते हैं मिट्टी को फूंक से समझ कर पाँव की धूल। फिर उड़ते…

चाँद हमेशा से कल्पनाशील लोगों की मानो धरोहर रहा है खूबसूरत महबूबा से लेकर पति की लम्बी उम्र तक की सारी तुलनाये जैसे चाँद से ही शुरू होकर चाँद पर ही ख़तम हो जाती हैं.और फिर कवि मन की तो कोई सीमा ही नहीं है उसने चाँद के साथ क्या क्या प्रयोग नहीं किये…बहुत कहा वैज्ञानिकों ने कि चाँद की…

–“अरे तब तरबूज काट कर कौन खाता था. खेतों पर गए, वहीं तोड़ा घूँसा मार कर बीच में से, खड़ा नमक छिड़का और हाथ से ही खा लिया आखिर में रस बच जाता था तो सुढक़ लिए उसे यूँ ही. -दावतें भी मीठी और नमकीन अलग अलग होती थीं. एक- एक बालक सेर -सेर भर रबड़ी खा जाता था. घर के बुजुर्ग…

लन्दन का मौसम आजकल अजीब सा है या फिर मेरे ही मन की परछाई पड़ गई है उसपर.यूँ ग्रीष्म के बाद पतझड़ आने का असर भी हो सकता है.पत्ते गिरना अभी शुरू नहीं हुए हैं पर मन जैसे भावों से खाली सा होने लगा है. सुबह उठने के वक़्त अचानक जाने कहाँ से निद्रा आ टपकती है ऐसे घेर लेती है कि…

एक दिन पड़ोस की नानी और अपनी मुन्नी में ठन गई। अपनी अपनी बात पर दोनों ही अड्ड गईं। नानी बोली क्या जमाना आ गया है…  घड़ी घड़ी डिस्को जाते हैं,  बेकार हाथ पैर हिलाते हैं ये नहीं मंदिर चले जाएँ, एक बार मथ्था ही टेक आयें॥ मुन्नी चिहुंकी तो आपके मंदिर वाले डिस्को नहीं जाते थे? ये बात और…