“बिहार की एक ट्रेन में, बोतल से पानी पी लेने पर एक युवक की कुछ लोगों ने जम कर पिटाई कर दी” सोशल मीडिया पर छाई इस एक खबर ने मुझे न जाने कितनी ही बातें याद दिला दीं जिन्हें मैं इस मुगालते में भुला चुकी थी कि अब तो बहुत समय बीत गया। हालात सुधर गए होंगें।  पर क्या…

भूखे नंगों का देश है भारत, खोखली महाशक्ति है , कश्मीर से अलग हो जाना चाहिए उसे .और भी ना जाने क्या क्या विष वमन…पर क्या ये विष वमन अपने ही नागरिक द्वारा भारत के अलावा कोई और देश बर्दाश्त करता ? क्या भारत जैसे लोकतंत्र को गाली देने वाले कहीं भी किसी भी और लोकतंत्र में रहकर उसी को गालियाँ…

आज निकली है धूप  बहुत अरसे बाद  सोचती हूँ  निकलूँ बाहर  समेट लूं जल्दी जल्दी  कर लूं कोटा पूरा  मन के विटामिन डी का  इससे पहले कि  फिर पलट आयें बादल  और ढक लें  मेरी उम्मीदों के सूरज को. ******** यूँ धुंधलका शाम का भी बुरा नहीं  सिमटी होती है उसमें भी  लालिमा दिन भर की  जिसे ओढ़कर सो जाता…

इंटर नेट नहीं था तो उसका एक फायदा हुआ | दो  बहुत ही बेहतरीन पुस्तकें पढ़ने का मौका मिल गया. एक तो समीर लाल जी की ”  देख लूँ तो चलूँ ” आ गई भारत से कनाडा और फिर यॉर्क होती हुई. दूसरी संगीता जी की ” उजला आस्मां ” आखिर कार दो  महीने भारत में ही यहाँ वहां भटक कर…

ताल तलैये सूख चले थे,  कली कली कुम्भ्लाई थी ।  धरती माँ के सीने में भी  एक दरार सी छाई थी।   बेबस किसान ताक़ रहा था,  चातक भांति निगाहों से,  घट का पट खोल जल बूँद  कब धरा पर आएगी….   कब गीली मिटटी की खुशबू  बिखरेगी शीत हवाओं में,  कब बरसेगा झूम के सावन  ऋतू प्रीत सुधा बरसायेगी।   तभी श्याम…