तू बता दे ए जिन्दगी किस रूप में चाहूँ तुझे मैं? क्या उस ओस की तरह जो गिरती तो है रातों को फ़िर भी दमकती है. या उस दूब की तरह जिसपर गिर कर शबनम चमकती है. या फिर चाहूँ तुझे एक बूँद की मानिंद . निस्वार्थ सी जो घटा से अभी निकली है. मुझे बता दे ए जिन्दगी किस रूप में चाहूँ तुझे मैं.…
शौर्य गाथाएँ – जैसा कि शीर्षक से ही अंदाजा हो जाता है कि यह संकलन वीरों के पराक्रम और त्याग की कहानियों से भरा होगा. यह संग्रह पिटारा है उन रणबांकुरों के जीवन की सच्ची कहानियों का, जो अपने घर – परिवार, सुख – सुविधाओं और यहाँ तक कि अपनी जान की भी तिलांजलि देकर डटे रहते हैं सीमा और रणक्षेत्रों पर कि उनके…
все те же Я тоже была наивной, В воды Волги опустив ноги В воды, смешанные с моими слезами Все равно вспоминала о Ганге. Горы видела – горы Урала, Только думала о Гималаях. И не знала я о том раньше: Да, зовут их, порой, непохоже, Только вода все та же Только земля все та же. (шиха варшней) सब एक ही. कैसी…



