दूर क्षितिज पे सूरज ज्यूँ ही डूबने लगा गहन निशब्द निशा के एहसासों ने उसके जीवन के प्रकाश को ढांप दिया हौले हौले अस्त होती किरणों की तरह उसके मन की रौशनी भी डूब रही थी इधर खाट पर माँ अधमरी पड़ी थी और छोटी बहन के फटे फ्रॉक पर जंगली चीलों की नज़र गड़ी थी। उसी क्षण उसके अन्दर…
दुनिया का एक सर्वोच्च गणराज्य है उसके हम आजाद बाशिंदे हैं पर क्या वाकई हम आजाद हैं? रीति रिवाजों के नाम पर कुरीतियों को ढोते हैं , धर्म ,आस्था की आड़ में साम्प्रदायिकता के बीज बोते हैं। कभी तोड़ते हैं मंदिर मस्जिद कभी जातिवाद पर दंगे करते हैं। क्योंकि हम आजाद हैं…. कन्या के पैदा होने पर जहाँ माँ का…

