हमारे समाज को रोने की और रोते रहने की आदत पढ़ गई है . हम उसकी बुराइयों को लेकर सिर्फ बातें करना जानते हैं, उनके लिए हर दूसरे इंसान पर उंगली उठा सकते हैं परन्तु उसे सुधारने की कोशिश भी करना नहीं चाहते .और यदि कोई एक कदम उठाये भी तो हम पिल पड़ते हैं लाठी बल्लम लेकर उसके पीछे…

Pavn ke Pankh      By Shikha Varshney SOME OBSERVATIONS Glanced through the book while reading chapters on places visited by us also but long long ago ; to be more specific during June 1979 when we visited England , Belgium , Luxemburg ,Germany , Austria , Switzerland , Italy and France . To start with the book, read details about Switzerland…

हो वेदकलीन तू मनस्वी या राज्य स्वामिनी तू स्त्री रही सदा ही पूजनीय  तू बन करुणा त्याग की देवी  सीता भी तू, अहिल्ल्या भी तू रंभा भी तू, जगदंबा भी तू है अगर गार्गी, मैत्रैई तो, रानी झाँसी, संयोगिता  भी तू फिर क्यों तू आज़ भटक रही? पुरुष समकक्ष  होने को लड़ रही? खो कर अस्तित्व ही अपना अधिकार ये…

एक बेहद दुखद सूचना अभी अभी मिली है कि प्रख्यात हिंदी साहित्यकार डॉ. विवेकी राय का आज सुबह पौने पांच बजे वाराणसी में निधन हो गया है। बीते 19 नवंबर को ही उन्होंने अपना 93वां जन्मदिन मनाया था.  उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यश भारती से भी सम्मानित विवेकी राय जी ने हिंदी में ललित निबंध, कथा साहित्य, उपन्यास के साथ साथ भोजपुरी साहित्य में भी एक आंचलिक उपन्यासकार…

मुस्कुराहटें संक्रामक होती है बहुत तेजी से फैलती हैं साथ ही चिंता, दुःख जैसे वायरस के लिए एंटी -वायरल  भी होती है. फिर वह मुस्कुराहटें मरीज की हों या मरीज के साथ वाले की उनका प्रभाव सामने वाले पर अवश्य ही पड़ता है और इसी मुस्कराहट से उपजी सकारात्मकता से बेशक मुश्किलें न सुलझें पर कुछ वक्त के लिए भुलाई…