नादान आँखें. बडीं मनचली हैं तुम्हारी ये नादान आँखें जरा मूँदी नहीं कि झट कोई नया सपना देख लेंगी. इनका तो कुछ नहीं जाता हमें जुट जाना पड़ता है उनकी तामील में करना पड़ता है ओवर टाइम . अपने दिल और दिमाग की इस शिकायत पर आज रात खुली आँखों मे गुजार दी है मैने. न नौ मन तेल होगा न राधा…





