तब डबल बेड पर चार और लोगों के साथ सिकुड़े – सिकुड़े लेट कर सोने में जो सुकून आता था, आज किंग साइज़ के पलंग पर फ़ैल कर सोने में भी नहीं आता. वह सुकून आपसी विश्वास का था. इस विश्वास का कि आजू बाजू जो लोग हैं वे अपने हैं, साथ हैं और हमेशा साथ और यदि हम साथ साथ हैं…

तेरी मेरी जिन्दगी  उस रसीली जलेबी की तरह है जिसे देख ललचाता है हर कोई कि काश ये मेरे पास होती नहीं देख पाता वो उसके  गोल गोल चक्करों को  उस घी की तपन को  जिसमें तप कर वो निकली है. ************************* कभी कोई लिखने बैठे  कहानी तेरी मेरी  तो वो दुनिया की  सबसे छोटी कहानी होगी जिसमें सिर्फ एक…

सपनो को बंद करके पलक पर थे हम चले। शब्दों के कुछ फूल मन बगिया में जो खिले समेट कर आज इन्हें बिखरा दिया है इसकदर तमन्ना है की आपकी पलकों पर ये सजें ************************ बड़ी शिद्दत से बिछाये बैठे थे प्यार के गलीचे को खबर क्या थी उसमें खटमल भी आ जाया करते हैं ************* आज इस बारिश की…

खुशनुमा सी एक शाम को यूं ही बैठे, मन पर पड़ी मैली चादर जो झाड़ी तो, गिर पड़े कुछ मुरझाये वो स्वप्नफूल, बरसों पहले दिल में दबा दिया था जिनको. पर जैसे दिल में कहीं कोई सुराग था, की हौले हौले सांस ले रहे थे सपने, पा कर आज अंशभर ऊष्मा ली अंगडाई, उमंग खिलने की फिर से जाग उठी…

बचपन से राजा महाराजाओं ,राजघरानो के किस्से सुनते आये हैं.उनके वैभव, राजसी ठाट बाट, जो कभी भी किसी भी हालत में कम नहीं होते थे. बेशक जनता के घर खाली हो जाएँ पर राजा का खजाना कभी खाली नहीं होता था.. राज परिवार में से किसी की  भी सवारी नगर से निकलती तो सड़क के दोनों और जनता उमड़ पड़ती.बच्चे ,बूढ़े, स्त्रियाँ सभी करबद्ध खड़े…