लोकप्रिय प्रविष्टियां

कौन कहता है दर पे उसके, देर है- अंधेर नही, मुझे तो रोशनी की एक, झलक भी नही दिखती. मिलना हो तो मिलता है, ख़ुशियों का अथाह समुंदर भी, पर चाहो जब तो उसकी, एक छोटी सी लहर भी नही दिखती. हज़ारों रंग के फूल हैं, दुनिया के बगानों में, मगर मेरे तो नन्हें दिल की एक कली भी नही…

कल यहाँ (लन्दन में ) बी बी सी 3 पर भारत में हुए दामिनी हादसे और उसके प्रभाव पर एक कार्यक्रम दिखाया जा रहा था. जिसमें भारतीय मूल की एक ब्रिटिश लड़की नेट आदि पर उस हादसे को देखकर इतना विचलित होती है कि  वह खुद भारत जाती है, वहां लड़कियों की स्थिति का जायजा लेने। जाने से पहले वह अपनी अलमारी खोल कर ले…

कल रात सपने में वो मिला था  कर रहा था बातें, न जाने कैसी कैसी  कभी कहता यह कर, कभी कहता वो  कभी इधर लुढ़कता,कभी उधर उछलता  फिर बैठ जाता, शायद थक जाता था वो  फिर तुनकता और करने लगता जिरह  आखिर क्यों नहीं सुनती मैं बात उसकी  क्यों लगाती हूँ हरदम ये दिमाग  और कर देती हूँ उसे नजर अंदाज  मारती रहती हूँ…

     “भारत के घरों में बाथरूम की बनावट में सुधार की सबसे अहम जरुरत है. जिसे देखो वह वहीँ गिरता है. जब भी सुनने को मिले कि फलाना गिर गया, हड्डी टूट गई या फलानी फिसल गई, कुल्हा टूट गया. यह पूछने की जरुरत ही नहीं पड़ती कि कहाँ?  कैसे?. वजह एक ही होती है – बाथरूम गीला था …..”…

सभी साहित्यकारों से माफी नामे सहित . कृपया निम्न रचना को निर्मल हास्य के तौर पर लें. आजकल मंदी का दौर है उस पर गृहस्थी का बोझ है  इस काबिल तो रहे नहीं कि  अच्छी नौकरी पा पायें  तो हमने सोचा चलो  साहित्यकार ही बन जाएँ  रोज कुछ शब्द  यहाँ के वहां लगायेंगे और नए रंगरूटों को  फलसफा ए लेखन सिखायेंगे कुछ नए…

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