रो रो के धो डाले हमने, जितने दिल में अरमान थे। हम वहाँ घर बसाने चले, जहाँ बस खाली मकान थे। यूँ तो दिल लगाने की, हमारी भी थी आरज़ू, ढूँढा प्यार का कुआँ वहाँ, जहाँ लंबे रेगिस्तान थे। हम तो यूँ ही बेठे थे तसव्वुर में किसी के, बिखरे टूट के शीशे की तरह कितने हम नादान थे। एक…




