लोकप्रिय प्रविष्टियां

सफ़ेद रंग का लम्बा वाला लिफाफा था और मोती से जड़े उसपर अक्षर. देखते ही समझ गई थी कि ख़त पापा ने लिखा है. पर क्या???? आमतौर पर पापा ख़त नहीं लिखा करते थे.बहने ही लिखा करतीं थीं और उनके लिफाफे गुलाबी,नीले ,पीले हुआ करते थे. कोई जरुरी बात ही रही होगी. झट से खोला था तो दो बड़े बड़े…

अहसास तेरी मासूम निगाहों का मेरी सर्द निगाहों से इस कदर मिला कि  सारी क़ायनात पीछे छोड़ कर मैं तेरी नज़रों मे मशगूल हो गया। तेरे दिल के सॉफ आईने मे देखा जो तसव्वुर अपना मैने सारे जमाने की मोहब्बत का हसीन अहसास अधूरा हो गया। सुनी जो धीमी-धीमी रुनझुन तेरे पावं मे खनकती पायल की मंदिर में बजती हुई घंटी…

दुनिया की सबसे स्वार्थी, जीरो नैतिक मूल्य और असंवेदनशील कौम साबित हो रहे हैं हम. यह सही है कि किसी भी आपदा या महामारी के लिए कोई भी देश, बेशक कितना भी विकसित और संपन्न क्यों न हो, कभी तैयार नहीं हो सकता. पिछले साल जब इटली, फ़्रांस, स्पेन, यूके जैसे देशों से भयावह खबरें आ रही थीं तब वहां…

कहते हैं,  गरजने वाले बादल बरसते नहीं  पर यहाँ तो गर्जन भी है और बौछार भी  जैसे रो रहे हों बुक्का फाड़ कर.  चीर कर आसमान का सीना  धरती पर टपक पड़ने को तैयार.  बताने को अपनी पीड़ा.  कि भर गया है उनका घर  उस गहरे काले धुएं से  जो निकलता है  धरती वालों की फैक्ट्रियों से.  दम घुटता है…

  कुछ अंगों,शब्दों में सिमट गई  जैसे सहित्य की धार  कोई निरीह अबला कहे,  कोई मदमस्त कमाल. ******************* दीवारों ने इंकार कर दिया है  कान लगाने से  जब से कान वाले हो गए हैं  कान के कच्चे. ********************* काश जिन्दगी में भी  गूगल जैसे ऑप्शन होते  जो चेहरे देखना गवारा नहीं  उन्हें “शो नेवर” किया जा सकता  और अनावश्यक तत्वों को…

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