लोकप्रिय प्रविष्टियां

अभी तक नस्लवाद का इल्जाम पश्चिमी विकसित देशों पर ही लगता रहा है.आये दिन ही नस्लवादी हमलों के शिकार होने वालों की खबरे आती रहती हैं. कभी ऑस्ट्रेलिया से, तो कभी ब्रिटेन से तो कभी अमेरिका से. पर क्या कभी आपने सुना या सोचा कि अंग्रेज़ भी कभी इस नस्लवाद का शिकार हो सकते हैं.कुछ अजीब लगता है ना ? पर आजकल…

सूनसान सी पगडण्डी पर  जो हौले हौले चलता है. शायद मेरा वजूद है. जो करता है हठ,  चलने की पैंया पैंया   बिना थामे  उंगली किसी की.  डर है मुझे  फिर ना गिर जाये कहीं  ठोकर खाकर. नामुराद  जिद्दी कहीं का. …

संसार एक मुट्ठी में .यही भाव आता है आज का लन्दन देख कर .लन्दन का नाम आते ही ज़हन  में एक बहुत  ही आलीशान शहर की छवि उभरती हैं .बकिंघम पेलेस, लन्दन ब्रिज, लन्दन आई, मेडम तुसाद  और भी ना जाने क्या क्या.  पर इन सबसे अलग एक लन्दन और भी है, एक ऐसा शहर जो सारी दुनिया खुद में समाये…

कौन कहता है दर पे उसके, देर है- अंधेर नही, मुझे तो रोशनी की एक, झलक भी नही दिखती. मिलना हो तो मिलता है, ख़ुशियों का अथाह समुंदर भी, पर चाहो जब तो उसकी, एक छोटी सी लहर भी नही दिखती. हज़ारों रंग के फूल हैं, दुनिया के बगानों में, मगर मेरे तो नन्हें दिल की एक कली भी नही…

कभी कहा जाता था गुप्त दान, महा दान. कि दान ऐसे करो कि एक हाथ से करो तो दूसरे को भी पता नहीं चले. खैर वो ज़माना तो चला गया और अब दान ने एक फैशन का सा स्वरुप ले लिया है. जहाँ एक भेड़चाल के चलते हम दान करते हैं और उससे भी अधिक उसका दिखावा. इसी फैशन के…

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