भावनाऐं हिंदी कविता की किताब हो गईं हैं जो ढेरों उपजती हैं पर पढीं नहीं जातीं. ****** भावनाऐं प्रेशर कुकर भी हैं जब बढ़ता है दबाब तो मचाती हैं शोर चाहती है सुने कोई कि पक चुकी हैं. बंद की जाये आंच अब. ********* भावनाओं का ज्वर जब चढ़ता है तो चाहिए होता है स्पर्श माथे पर ठंडी पट्टी सा दो चम्मच मधुर…





