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आज भी, जब भी विदेशी मीडिया में हिन्दुस्तान का जिक्र होता है तो उसमें सांप भालू का नाच दिखाते लोग, मूर्तियों को दूध पिलाते लोग दिखाए जाते हैं, भारत को किस्से कहानियों का, तमाशबीनों का देश समझा जाता है जिसके नागरिक किवदंतियों और चमत्कारिक कहानियों को अपना इतिहास बताते हैं. जी हाँ, बरसों से सुनते आये हैं कि हम भारतीय बेबकूफ…

एक बेहद दुखद सूचना अभी अभी मिली है कि प्रख्यात हिंदी साहित्यकार डॉ. विवेकी राय का आज सुबह पौने पांच बजे वाराणसी में निधन हो गया है। बीते 19 नवंबर को ही उन्होंने अपना 93वां जन्मदिन मनाया था.  उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यश भारती से भी सम्मानित विवेकी राय जी ने हिंदी में ललित निबंध, कथा साहित्य, उपन्यास के साथ साथ भोजपुरी साहित्य में भी एक आंचलिक उपन्यासकार…

जी हाँ …हम बेकार ही विदेशी इवेंट्स मनाने में हंगामा करते हैं ..कि वेलेंटाइन डे. क्रिसमस ..विदेशी त्यौहार है हम नहीं मनाएंगे इनसे हमारी संस्कृति को खतरा है..परन्तु और कुछ हो न हो थोड़ी व्यावहारिकता, और डिप्लोमेसी हमें इन अंग्रेजों से सीख ही लेनी चाहिए..हमसे ,हमारे ही बारे में सब जानकार अपना फायदा कैसे किया जाता है ये गुण बेशक…

लरजती सी टहनी पर झूल रही है एक कली सिमटी,शरमाई सी थोड़ी चंचल भरमाई सी   टिक जाती है हर एक की नज़र हाथ बढा देते हैं सब उसे पाने को  पर वो नहीं खिलती इंतज़ार करती है  बहार के आने का कि जब बहार आए तो कसमसा कर  खिल उठेगी वह  आती है बहार भी  खिलती है वो कली भी…

все те же Я тоже была наивной, В воды Волги опустив ноги В воды, смешанные с моими слезами Все равно вспоминала о Ганге. Горы видела – горы Урала, Только думала о Гималаях. И не знала я о том раньше: Да, зовут их, порой, непохоже, Только вода все та же Только земля все та же. (шиха варшней)  सब एक ही. कैसी…

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