लोकप्रिय प्रविष्टियां

. आज इन पलकों में नमी जाने क्यों है  रवानगी भी इतनी थकी सी जाने क्यों है  जाने क्या लाया है समीर ये बहा के  सिकुड़ी सिकुड़ी सी ये हंसी जाने क्यों है. खोले बैठे हैं दरीचे  हम नज़रों के  आती है रोशनी भी  उन गवाक्षों से  दिख रहा है राह में आता हुआ उजाला  बहकी बहकी सी ये नजर जाने क्यों…

“क्या आपके कारोबार में घाटा हो रहा है?,या आपके बच्चे आपका कहा नहीं मानते और उनका पढाई में मन नहीं लगता , या आपकी बेटी के शादी नहीं हो रही ? क्या आप पर किसी ने जादू टोना तो नहीं किया ? यदि हाँ तो श्री …..जी महाराज आपकी समस्या का समाधान कर सकते हैं। यदि आप पर किसी ने काला जादू किया है तो ऊपर वाले की…

लन्दन – पुस्तकों की दुकानों, पुस्तकालयों , प्रकाशकों , लेखकों का शहर .लेकिन इस शहर में तीन में से एक बच्चा बिना अपनी एक भी किताब के बड़ा होता है.जहाँ ८५% बच्चों के पास उसका अपना एक्स बॉक्स ३६० है , टीवी पर अपना कण्ट्रोल है, पूरा कमरा खिलोनो से भरा पडा है, ८१ % के पास अपना मोबाइल फ़ोन है.…

  छोड़ना होगा उसे वह घर वह आंगन, वह फर्श, वह छत। जिससे जुड़ा है उसका जन्म, बचपन, उसका यौवन, उसका जीवन। कहते हैं लोग इसी में उसकी भलाई है यही रीत चली आई है। अब वह खुद ही खुद को संभाले भोगे अपने सुख दुख अकेले पुराने नातों को बिसरा दे। वह ठिठकती है हर कदम पर निकलने में…

लन्दन की बारिश का यूँ तो कभी कोई भरोसा नहीं, और लन्दन वासियों की इसकी खासी आदत भी है।परन्तु कभी कभी जब किसी खास आयोजन में जाना हो यह मोहतरमा बिना किसी पूर्व सूचना के आ धमकें तो बहुत ही खला करती हैं।ऐसा ही कुछ हुआ 19अक्तूबर की शाम को जब हमें “एशियन कम्युनिटी ऑफ़ आर्ट्स” द्वारा प्रसिद्ध कथाकार तेजेंद्र  शर्मा के…

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