लोकप्रिय प्रविष्टियां

यह उस दौर की बात है जब न तो मोबाइल फ़ोन थे, न सोशल मीडिया और न ही पूरी दुनिया को एक क्लिक से जोड़ता हुआ इन्टरनेट. ले दे कर या काले चोगे वाला जम्बो टेलीफोन था, (जिसकी लोकल कॉल्स भी खासी महँगी थीं) या फिर दूरदर्शन. इनके इस्तेमाल पर भी माँ बाप का पहरा रहा करता था. तो बेचारे नए…

कभी कहा जाता था गुप्त दान, महा दान. कि दान ऐसे करो कि एक हाथ से करो तो दूसरे को भी पता नहीं चले. खैर वो ज़माना तो चला गया और अब दान ने एक फैशन का सा स्वरुप ले लिया है. जहाँ एक भेड़चाल के चलते हम दान करते हैं और उससे भी अधिक उसका दिखावा. इसी फैशन के…

चॉकलेट,मिठाई  आलिंगन, चुम्बन. गुलाब और टैडी  सारे पड़ावों से गुजर  आखिर में  प्रेम का नंबर आ ही गया  सुना है आज प्रेम दिवस है. ************* रीत कुछ हम भी निभा लें, कुछ लाल तुम पहन लो  कुछ लाल मैं भी पहन लूं  चलो हाथ में हाथ डाल  कुछ दूर यूँ ही टहल आयें कमबख्त लाल फूल भी आज  बहुत महंगे हैं. *******************  खाली बगीचे से मन …

कभी कभी फ़ोन के घंटी कितनी मधुर हो सकती है इसका अहसास  कभी ना कभी हम सभी को होता है ,  मुझे भी हुआ जब सामने से आवाज़ आई ..शिखा जी ,  आपके संस्मरण को हाई कमीशन द्वारा घोषित लक्ष्मी मल्ल सिंघवी प्रकाशन अनुदान  सम्मान दिया जायेगा. कृपया वक्त पर हाई कमीशन पहुँच जाएँ. लैटर आपको १-२ दिन मे मिल जाएगा ...शब्द जैसे…

मोस्को में पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान, हमारे मीडिया स्टडीज के शिक्षक कहा करते थे कि पत्रकारिता किसी भी समय या सीमा से परे है. आप या तो पत्रकार हैं या नहीं हैं. यदि पत्रकार हैं तो हर जगह, हर वक़्त हैं. खाते, पीते, उठते, बैठते, सोते, जागते हर समय आप पत्रकारिता कर सकते हैं. आप बेशक सक्रीय पत्रकार न हों परन्तु…

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