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पापा तुम लौट आओ ना, तुम बिन सूनी मेरी दुनिया, तुम बिन सूना हर मंज़र, तुम बिन सूना घर का आँगन, तुम बिन तन्हा हर बंधन.  पापा तुम लौट आओ ना याद है मुझे वो दिन,वो लम्हे , जब मेरी पहली पूरी फूली थी, और तुमने गद-गद हो 100 का नोट थमाया था. और वो-जब पाठशाला से मैं पहला इनाम…

  वो जो आसमां में रोशनी सी चमकी है अभी, शायद तुम ही हो जिसकी रूह मुस्कुराई है। निहारा है जो बड़ी बड़ी गोल गोल आंखों से, तो शायद ये आब मेरी पलकों में उतर आई है। ये जो मेरे दिल में अचानक से हूक उठती है कभी, तुम्हारी ही रुबाई है जो मेरे शब्दों में कविताई है। हो न…

हाँ मैंने देखा था उसे उस रोज़ जब पंचर हो गया था उसकी कार का पहिया घुटने मोड़े बैठा था गीली मिट्टी में जैक लिए हाथ में घूर रहा था पहिये को और फिर बीच बीच में आसमान को शायद वहीँ से कुछ मदद की आस में गंदे नहीं करने थे उसे अपने हाथ पर गालों पर लग चुकी थी ग्रीस जतन में…

नारी बंद खिड़की के पीछे खड़ी वो, सोच रही थी कि खोले पाट खिड़की के, आने दे ताज़े हवा के झोंके को, छूने दे अपना तन सुनहरी धूप को. उसे भी हक़ है इस आसमान की ऊँचाइयों को नापने का, खुली राहों में अपने , अस्तित्व की राह तलाशने का, वो भी कर सकती है अपने, माँ -बाप के अरमानो…

बहुत समय से भारत के प्रसिद्द आई आई टी के किसी छात्र से बातचीत करने की इच्छा थी.मन था कि जानू जिस नाम का दबाब बेचारे भारतीय बच्चे पूरा छात्र जीवन झेलते हैं उस संस्था में पढने वाले बच्चे क्या सोचते हैं.कई बार कोशिश की पर जब मैं फ्री होती तो उसके इम्तिहान चल रहे होते (गोया वहां पढाई से ज्यादा…

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