तेरे रुमाल पर जो धब्बे नुमायाँ हैं साक्षी हैं हमारे उन एहसासात के एक एक बूँद आंसू से जिन्हें हमने साझा किया था सागर की लहरों को गिनते हुए. ******************************** इतनी देर तक जो इकठ्ठा होते रहे उमड़ते रहे घुमड़ते रहे इन आँखों में. अब जो छलके तो गुनगुने नहीं ठन्डे लगेंगे ये आंसू. ************************ * बंद होते ही पलक से जो बूँद शबनम सी गिरती…






