तुम्हारे उठने और मेरे गिरने के बीच बहुत कम फासला था. बहुत छोटी सी थी ये जमीं या तो तुम उठ सकते थे या मै ही, मैंने उठने दिया दिया था तुम्हे अपने कंधो का सहारा देकर उसमे झुक गए मेरे कंधे आहत हुआ अंतर्मन पर ह्रदय प्रफुल्लित था आत्मा की आवाज़ सुनकर. पर आज सबकुछ नागवार सा है, भूल…






