आलेख

दुनिया की सबसे स्वार्थी, जीरो नैतिक मूल्य और असंवेदनशील कौम साबित हो रहे हैं हम. यह सही है कि किसी भी आपदा या महामारी के लिए कोई भी देश, बेशक कितना भी विकसित और संपन्न क्यों न हो, कभी तैयार नहीं हो सकता. पिछले साल जब इटली, फ़्रांस, स्पेन, यूके जैसे देशों से भयावह खबरें आ रही थीं तब वहां…

प्रिय बेटियों, पूरी आशा है तुम वहाँ कुशल पूर्वक होगी। हम यहाँ ठीक हैं। तुम्हारी मम्मी भी आ गईं हैं। वह भी ठीक हैं। हम रोज चाय के समय तुम लोगों को याद करते हैं। मम्मी तुम लोगों के समाचार देती हैं। उनकी बातें खत्म ही नहीं होतीं। ऐसा लगता है न जाने कब से नहीं बोलीं हैं। यह जगह…

COVID-19 हमारे जीवनकाल की सबसे बड़ी वैश्विक घटना भी है और चुनौती भी. 2019 के अंत में कोरोना वायरस (COVID-19) का प्रकोप फैलना शुरू हुआ और 30 जनवरी, 2020 को अंतर्राष्ट्रीय विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इसे माहामारी घोषित करते हुए आपातकाल की घोषणा कर दी गई। आज 6 महीने बाद भी पूरी दुनिया की आबादी का एक व्यापक टुकड़ा मुख्य रूप से…

प्रकृति अपना संतुलन खुद बना लेती है. कितने संकेत दिए उसने, ग्लोबल वॉर्मिंग, पानी की कमी, सुनामी, भूकम्पों द्वारा कि रुक जाओ , संभल जाओ, वर्ना सब ख़त्म हो जायेगा. पर नहीं … हम मनु की संताने अपने आप को किसी ईश्वर से कम नहीं समझतीं. हम हर समस्या का हल निकाल लेंगे. दिमाग पाया है हमने ऐसा. कितना ज्यादा हो गया…

वोआते थे हर साल। किसी न किसी बहाने कुछ फरमाइश करते थे। कभी खाने की कोई खास चीज, कभी कुछ और। मैं सुबह उठकर बहन को फ़ोन पे अपना वह सपना बताती, यह सोचकर कि बाँट लुंगी कुछ भीगी बातें। पता चलता कि एक या दो दिन बाद उनका श्राद्ध है। मैं अवाक रह जाती। मुझे देश से बाहर होने…

ग्रीष्मकालीन अवकाश, स्कूल वर्ष और स्कूल के शैक्षणिक वर्ष के  बीच गर्मियों में स्कूल की एक लम्बी छुट्टी को कहते है। देश और प्रांत के आधार पर छात्रों और शिक्षण स्टाफ को आम तौर पर छ: से आठ सप्ताह के बीच यह अवकाश दिया जाता है। जहाँ भारत में यह अवकाश सामान्यत: पाँच से छ: सप्ताह का होता है वहीँ संयुक्त…

बच्चे न तो आपकी मिल्कियत होते हैं न ही फिक्स डिपॉजिट जिन्हें आप जब चाहें, जैसे मर्जी चाहें रख लें या भुना लें। बच्चे तो आपके माध्यम से इस समाज और दुनिया को दिया गया सर्वोत्तम उपहार हैं जिन्हें आप अपनी सम्पूर्ण क्षमता और अनुराग के साथ पालते हैं, निखारते हैं और इस दुनिया के लायक बनाते हैं। उनपर आपका…

बहुत दिनों से कुछ नहीं लिखा। न जाने क्यों नहीं लिखा। यूँ व्यस्तताएं काफी हैं पर इन व्यस्तताओं का तो बहाना है. आज से पहले भी थीं और शायद हमेशा रहेंगी ही. कुछ लोग टिक कर बैठ ही नहीं सकते। चक्कर होता है पैरों में चक्कर घिन्नी से डोलते ही रहते हैं. न मन को चैन, न दिमाग को, न ही पैरों को.…

BHU की समस्या और हालात के बारे में मैं इतना ही जानती हूँ जितना सोशल साइट्स पर पढ़ा. जितना भी समझ में आया उससे इतना अनुमान अवश्य लगा कि समस्या कुछ और है और हंगामा कुछ और. मुझे अपने स्कूल में हुआ एक वाकया याद आ रहा है. हमारा स्कूल एक छोटे से शहर का “सिर्फ लड़कियों के लिए” स्कूल…

कभी कहा जाता था गुप्त दान, महा दान. कि दान ऐसे करो कि एक हाथ से करो तो दूसरे को भी पता नहीं चले. खैर वो ज़माना तो चला गया और अब दान ने एक फैशन का सा स्वरुप ले लिया है. जहाँ एक भेड़चाल के चलते हम दान करते हैं और उससे भी अधिक उसका दिखावा. इसी फैशन के…