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क्या ? क्यों ? किसके लिए ?

क्या ? क्यों ? किसके लिए ?

बहुत दिनों से कुछ नहीं लिखा। न जाने क्यों नहीं लिखा। यूँ व्यस्तताएं काफी हैं पर इन व्यस्तताओं का तो बहाना है. आज से पहले भी थीं और…'

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एक वो…

एक वो…

हाँ मैंने देखा था उसे उस रोज़ जब पंचर हो गया था उसकी कार का पहिया घुटने मोड़े बैठा था गीली मिट्टी में जैक लिए हाथ…'

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कुछ पा लिया कुछ बाकी है.

कुछ पा लिया कुछ बाकी है.

अधिकार हमने ले लिए सम्मान अभी बाकी है। बलिदान बहुत कर लिए, अभिमान अभी बाकी है। फर्लांग देहरी दिए बढ़ा, आसमाँ पे अपने कदम। खोल…'

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शिव, शक्ति, प्रेम

शिव, शक्ति, प्रेम

तू शिव है मैं शक्ति नहीं तू सत्य है मैं असत्य सही तू सुन्दर है मैं असुंदर वही पर कुछ है जो भीतर है गुनता है…'

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एक जरूरी “न” …

एक जरूरी “न” …

लो फिर आ गया वह दिन. अब तो आदत सी बन गई है इस दिन लिखने की. बेशक पूरा साल कुछ न लिखा जाए पर…'

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अलगनी पर टंगी उदासियाँ (विडियो /Video)

सर्वप्रिय प्रविष्ठियां

कुछ दिन पहले ही मुझे डाक से “प्रवासी पुत्र” (काव्य संग्रह) प्राप्त हुई है. कवर खोलते ही जो पन्ने पलटने शुरू किये तो एक के बाद एक कविता पढ़ती गई और एक ही बैठक में पूरी किताब पढ़ डाली. ऐसा नहीं कि किताब छोटी थी बल्कि उसकी कवितायें इतनी गहन…

अब नहीं होती उसकी आँखे नम जब मिलते हैं अपने अब नहीं भीगतीं उसकी पलके देखकर टूटते सपने। अब नहीं छूटती उसकी रुलाई किसी के उल्हानो से अब नहीं मरती उसकी भूख किसी के भी तानो से। अब किसी की चढ़ी तौयोरियों से नहीं घुटता मन उसका अब किसी की उपेक्षाओं…

10वीं 12वीं का रिजल्ट आया. किसी भी बच्चे के 90% से कम अंक सुनने में नहीं आये. पर इतने पर भी न बच्चा संतुष्ट है न उनके माता पिता। इसके साथ ही सुनने में आया पिछड़ी पीढ़ी का आलाप कि हमारे जमाने में तो इसके आधे भी आते थे तो…

पता है; पूरे 18 साल होने को आये. एक पूरी पीढ़ी जवान हो गई. लोग कहते हैं दुनिया बदल गई. पर आपको तो ऊपर से साफ़ नजर आता होगा न. लगता है कुछ बदला है ? हाँ कुछ सरकारें बदल गईं, कुछ हालात बदल गए. पर मानसिकता कहाँ बदली ? न सोच बदली. …

कभी कहा जाता था गुप्त दान, महा दान. कि दान ऐसे करो कि एक हाथ से करो तो दूसरे को भी पता नहीं चले. खैर वो ज़माना तो चला गया और अब दान ने एक फैशन का सा स्वरुप ले लिया है. जहाँ एक भेड़चाल के चलते हम दान करते…

शौर्य गाथाएँ – जैसा कि शीर्षक से ही अंदाजा हो जाता है कि यह संकलन वीरों के पराक्रम और त्याग की कहानियों से भरा होगा. यह संग्रह पिटारा है उन रणबांकुरों  के जीवन की सच्ची कहानियों का, जो अपने घर – परिवार, सुख – सुविधाओं और यहाँ तक कि अपनी जान की भी…

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