देवनागरी लिपि है मेरी, संस्कृत के गर्भ से आई हूँ.  प्राकृत, अपभ्रंश हो कर मैं,  देववाणी कहलाई हूँ. शब्दों का सागर है मुझमें,  झरने का सा प्रभाव है. है माधुर्य गीतों सा भी, अखंडता का भी रुआब है.  ऋषियों ने अपनाया मुझको,  शास्त्रों ने मुझे संवारा है.  कविता ने फिर सराहा मुझको,  गीतों ने पनपाया है.  हूँ गौरव आर्यों का…

कल हमारी बेटी के स्कूल में पेरेंट्स मीटिंग थी ..,जब हम वहाँ पहुंचे तो देखा कि अजब ही दृश्य था …एक हॉल में कचहरी की तरह लगीं कुर्सी- मेज़ और खचाखच भरे लोग ..आप उसे सभ्य मच्छी बाजार कह सकते हैं .हर पेरेंट को एक -एक विषय के लिए सिर्फ पांच मिनट पहले से ही दे दिए गए थे ..बस…

कैसे कहूँ मैं भारतीय हूँ  क्यों करूँ मैं गुमान  आखिर किस बात का  क्या जबाब दूं उन सवालों का  जो “इंडियन” शब्द निकलते ही  लग जाते हैं पीछे … वहीँ न ,  जहाँ रात तो छोड़ो  दिन में भी महिलायें  नहीं निकल सकती घर से ? बसें , ट्रेन तक नहीं हैं सुरक्षित क्यों दूधमुंही बच्चियों को भी  नहीं बख्शते…

(कार्टून गूगल से साभार ) हम भारतीय लोग स्वभाव से बड़े ही जल्दबाज होते हैं. झट से फैसले लेते हैं और झट से ही फैसला सुना देते हैं. हर काम , हर बात में जल्दबाजी। दूसरों की होड़ में जल्दबाजी , फिर उसमें कमियां निकालने में जल्दबाजी, फिर खुद को कोसने में जल्दबाजी, राय बनाने में जल्दबाजी, राय देने में…

प्रेम दिवस कहो या valentine day ..कितना खुबसूरत एहसास है …आज के दौर की इस आपा धापी जिन्दगी में ये एक दिन जैसे ठहराव सा ला देता है .एक दिन के लिए जैसे फिजा ही बदली हुई सी लगती है ..फूलो की बहार सी आ जाती है…हर चेहरा फूल सा खिला दीखता है..कोई गर्व से , कोई ख़ुशी से ,…