राष्ट्र मंडल खेल खतरे  में हैं क्यों?  क्योंकि एक जिम्मेदारी भी ठीक से नहीं निभा सकते हम .बड़े संस्कारों की दुहाई देते हैं हम. ” अतिथि देवो भव : का नारा लगाते हैं परन्तु अपने देश में कुछ मेहमानों का ठीक से स्वागत तो दूर उनके लिए सुविधाजनक व्यवस्था भी नहीं कर पाए. इतनी दुर्व्यवस्था  कि  मेहमान भी आने से मना…

हमारे देश में सैक्स और संस्कृति दो शब्द ऐसे हैं जिन पर जब चाहे हंगामा करा लो. एक जुबान से निकला नहीं कि हंगामा और दूसरा न निकले तो हंगामा। हमें बच्चों के सामने सैक्स से सम्बंधित माँ बहन की गाली देने से परहेज नहीं है, खजुराहो, कोणार्क की मूर्ति कला देखने- दिखाने से परहेज नहीं है परन्तु बच्चों को उनके…

आसमान के ऊपर भी एक और आसमान है, उछ्लूं लपक के छू लूँ  बस ये ही अरमान है। बना के इंद्रधनुष को अपनी उमंगों का झूला , बैठूँ और जा पहुँचूँ चाँद के घर में सीधा। कुछ तारे तोडूँ और भर लूँ अपनी मुठ्ठी में, लेके सूरज का रंग भर लूँ सपनो की डिब्बी में। उम्मीदों का ले उड़नखटोला जा उतरूं…

घर में नहीं दाने अम्मा चली भुनाने – गज़ब का सटीक मुहावरा गढ़ा है किसी ने. और आजकल के माहौल में तो बेहद ही सटीक दिखाई दे रहा है. जिसे देखो कुछ न कुछ लौटाने पर तुला हुआ है. किसे? ये पता नहीं। अपने ही देश का, खुद को मिला सम्मान, अपने ही देश को, खुद ही लौटा रहे हैं. बड़ी ही…

एक आंटी अंकल आये थे आज बड़ी सी चमचमाती कार में, वह बाते कर रहे थे दीदी से कुछ कागजों पर लिखा पढी भी की  सारा आश्रम देखा बाद में पूछा था उसने, तो दीदी ने बताया था, छोटू को लेने आये है छोटू को पूरा ग्लास दूध मिलेगा, बिना पानी मिला , मलाई वाला. और तीनों वक़्त का खाना भी,…