मोस्को में मेरी एक बहुत अच्छी मित्र थी श्रीलंका की… इतना अच्छा चिकेन बनाती  थी ना …रहने दीजिये वर्ना बाकी पोस्ट नहीं लिखी जाएगी .और इसका राज़ वो बताती थी वहां के मसाले .और भी बहुत  सी बातें की मोती बहुत अच्छे मिलते हैं वहां ,समुंद्री किनारे बहुत खूबसूरत हैं वगैरह वगैरह ..जिन्हें सुन सुन कर मेरा भी मन श्रीलंका देखने…

इस बार लंदन में ठण्ड बहुत देरी से  पड़नी शुरू हुई इसलिए अब भी अजीब सी पड़ रही है. सूखी सूखी सी. यहाँ तक कि लंदन में तो इस बार अब तक बर्फ तक नहीं पडी. पर ठण्ड ऐसी कि जैसे दिमाग में भी घुस गई हो. ग्लूमी – ग्लूमी सा मौसम फ़िज़ा में और वैसा ही मूड मन पर तारी…

इस पोस्ट की प्रेरणा मुझे खुशदीप जी की पोस्ट से मिली है. अभी १- २ दिन पहले उन्होंने पत्नियों को समझने के १० commandments बताये थे. जो बहुत मजेदार थे सबने बहुत आनंद उठाया ,परन्तु वो सिक्के का एक पहलू था , और दूसरा पहलू न दिखाया जाये तो ये बात तो ठीक नहीं .तब मैने वादा किया था खुशदीप…

इंटर नेट नहीं था तो उसका एक फायदा हुआ | दो  बहुत ही बेहतरीन पुस्तकें पढ़ने का मौका मिल गया. एक तो समीर लाल जी की ”  देख लूँ तो चलूँ ” आ गई भारत से कनाडा और फिर यॉर्क होती हुई. दूसरी संगीता जी की ” उजला आस्मां ” आखिर कार दो  महीने भारत में ही यहाँ वहां भटक कर…

  बसंत पंचमी ( भारतीय प्रेम दिवस ) बीत गया है ,पर बसंत चल रहा है और वेलेंटाइन डे आने वाला है ..यानी फूल खिले हैं गुलशन गुलशन ..अजी जनाब खिले ही नहीं है बल्कि दामों में भी आस्मां छू रहे हैं ,हर तरफ बस रंग है , महक है ,और प्यार ही प्यार बेशुमार . …वैसे मुझे तो आजतक…