ऑफिस से आकर उसने अलमारी खोली। पीछे से हैंगर निकाल कर निहारा। साड़ी पहनने की ख़ुशी ने कुछ देर के लिए सारा दिन भूख प्यास से हुई थकान को मिटा दिया। वह हर साल इसी बहाने एक नई साड़ी खरीद लिया करती है कि करवा चौथ पर काम आएगी। वर्ना यहाँ साड़ी तो क्या कभी सलवार कमीज पहनने के मौके…
रिश्ते मिलते हों बेशक स्वत: ही पर रिश्ते बनते नहीं बनाने पड़ते हैं। करने पड़ते हैं खड़े मान और भरोसे का ईंट, गारा लगा कर निकाल कर स्वार्थ की कील और पोत कर प्रेम के रंग रिश्ते कोई सेब नहीं होते जो टपक पड़ते हैं अचानक और कोई न्यूटन बना देता है उससे कोई भौतिकी का नियम। या ग्रहण कर लेते हैं मनु श्रद्धा और हो…



