हवा हुए वे दिन जब बच्चे की तंदरुस्ती से घर की सम्पन्नता को परखा जाता था. माताएं अपने बच्चे की बलाएँ ले ले नहीं थकती थीं कि मेरा बच्चा खाते पीते घर का लगता है. एक वक़्त एक रोटी कम खाई तो चिंता में घुल घुल कर बडबडाया करती थीं ..हाय मेरे लाल ने आज कुछ नहीं खाया शायद तबियत ठीक नहीं है. नानी दादी से जब भी बच्चा…
हमारे देश में सैक्स और संस्कृति दो शब्द ऐसे हैं जिन पर जब चाहे हंगामा करा लो. एक जुबान से निकला नहीं कि हंगामा और दूसरा न निकले तो हंगामा। हमें बच्चों के सामने सैक्स से सम्बंधित माँ बहन की गाली देने से परहेज नहीं है, खजुराहो, कोणार्क की मूर्ति कला देखने- दिखाने से परहेज नहीं है परन्तु बच्चों को उनके…
तेरे रुमाल पर जो धब्बे नुमायाँ हैं साक्षी हैं हमारे उन एहसासात के एक एक बूँद आंसू से जिन्हें हमने साझा किया था सागर की लहरों को गिनते हुए. ******************************** इतनी देर तक जो इकठ्ठा होते रहे उमड़ते रहे घुमड़ते रहे इन आँखों में. अब जो छलके तो गुनगुने नहीं ठन्डे लगेंगे ये आंसू. ************************ * बंद होते ही पलक से जो बूँद शबनम सी गिरती…



