मैं एक कविता बस छोटी सी  हर दिल की तह में रहती हूँ.   भावो से खिल जाऊं  मैं  शब्दों से निखर जाऊं मैं   मन  के अंतस  से जो उपजे मोती  सी यूँ रच उठती हूँ. मैं एक कविता बस छोटी सी  हर दिल की तह में रहती हूँ.   हर दर्द की एक दवा सी मैं  हर गम में एक दुआ सी…

एक मित्र को परिस्थितियों से लड़ते देख, उपजी कुछ पंक्तियाँ  पढ़ा था कहीं मैंने  किसी का लिखा हुआ कि  “शादी में मिलता है  गोद में एक बच्चा  एक बहुत बड़ा  बच्चा”. अक्षम हो जाते हैं जब  उसे और पालने में  उसके माता पिता, तो सौंप देते हैं  एक पत्नी रुपी जीव को.  जिसे देख भाल कर ले आते हैं वे  किसी…

10वीं 12वीं का रिजल्ट आया. किसी भी बच्चे के 90% से कम अंक सुनने में नहीं आये. पर इतने पर भी न बच्चा संतुष्ट है न उनके माता पिता। इसके साथ ही सुनने में आया पिछड़ी पीढ़ी का आलाप कि हमारे जमाने में तो इसके आधे भी आते थे तो लड्डू बांटते थे.  यह मुझे कुछ ऐसा ही लगता है…

ऑफिस से आकर उसने अलमारी खोली। पीछे से हैंगर निकाल कर निहारा। साड़ी पहनने की ख़ुशी ने कुछ देर के लिए सारा दिन भूख प्यास से हुई थकान को मिटा दिया। वह हर साल इसी बहाने एक नई साड़ी खरीद लिया करती है कि करवा चौथ पर काम आएगी। वर्ना यहाँ साड़ी तो क्या कभी सलवार कमीज पहनने के मौके…

जाने किसने छिड़क दिया है तेज़ाब बादलों पर, कि बूंदों से अब तन को ठंडक नहीं मिलती. बरसने को तो बरसती है बरसात अब भी यूँही, पर मिट्टी को अब उससे तरुणाई नहीं मिलती. खो गई है माहौल से सावन की वो नफासत, अब सीने में किसी के वो हिलोर नहीं मिलती. अब न चाँद महकता है, न रात संवरती…