दूर क्षितिज पे सूरज ज्यूँ ही डूबने लगा गहन निशब्द निशा के एहसासों ने उसके जीवन के प्रकाश को ढांप दिया हौले हौले अस्त होती किरणों की तरह उसके मन की रौशनी भी डूब रही थी इधर खाट पर माँ अधमरी पड़ी थी और छोटी बहन के फटे फ्रॉक पर जंगली चीलों की नज़र गड़ी थी। उसी क्षण उसके अन्दर…





