पिछले दिनों बाजार गई तो १६ वर्षीय एक बच्ची को ढेर सारी अलग अलग तरह की खुशबू  वाली मोमबत्तियां खरीदते हुए देखा। बच्ची मेरी जानकार थी सो मैंने पूछ लिया, अरे अभी तो क्रिसमस में बहुत समय है, क्या करोगी इतनी मोमबत्तियों का?. उसने जबाब दिया कि यह मोमबत्तियां वह अपने स्ट्रेस पर काबू पाने के लिए खरीद रही है. कुछ अलग अलग तरह की खास…

क्यों घिर जाता है आदमी, अनचाहे- अनजाने से घेरों में, क्यों नही चाह कर भी निकल पाता , इन झमेलों से ? क्यों नही होता आगाज़ किसी अंजाम का ,क्यों हर अंजाम के लिए नहीं होता तैयार पहले से? ख़ुद से ही शायद दूर होता है हर कोई यहाँ, इसलिए आईने में ख़ुद को पहचानना चाहता है, पर जो दिखाता…

बदलते वक़्त के साथ सब कुछ बदलता जाता है .रहने का तरीका ,खाने का तरीका ,त्यौहार मनाने का तरीका, मृत्यु  का  तरीका और जन्म लेने का तरीका, तो भला जन्म दिन मनाने का तरीका क्यों नहीं बदलेगा .अब देखिये ना जब छोटे बच्चे हुआ करते थे .ना तो टी वी था ना ही टेलीफ़ोन की इतनी सुविधा ,तो जन्म दिन…

बचपन में हम बहनें बहुत लड़ा करती थीं ..सभी भाई बहन का ये जन्म सिद्ध अधिकार है ..और लड़ते हुए गुस्से में एक दूसरे  को ना जाने क्या क्या कह दिया करते थे .तब मम्मी बहुत डाँटती थीं , कि शुभ शुभ बोला करो, ना जाने कौन से वक़्त माँ सरस्वती ज़ुबान पर बैठ जाये , और तीन  बार कुछ…

“महिला लेखन की चुनौतियाँ और संभावना” महिला लेखन की चुनौतियां – कहाँ से शुरू होती हैं और कहाँ खत्म होंगी कहना बेहद मुश्किल है. एक स्त्री जब लिखना शुरू करती है तब उसकी सबसे पहली लड़ाई अपने घर से शुरू होती है. उसके अपने परिवार के लोग उसकी सबसे पहली बाधा बनते हैं. और उसकी घरेलू जिम्मेदारियां और कंडीशनिंग उसकी कमजोरी। क्या…