ख्वाइशों की कश्ती में अरमानो की पतवार लिए जब हम निकले थे सपनो के समंदर में, तो सोचा न था वहाँ तूफ़ान भी आते हैं . कल्पना के पंख लगाये जब ये मन उड़ रहा था खुले आसमान में , तो ये मालूम न था कि वहाँ काले बादल भी छाते हैं… इस दिल के बगीचे में कुछ कोमल खुशबू…





