सपनो को बंद करके पलक पर थे हम चले। शब्दों के कुछ फूल मन बगिया में जो खिले समेट कर आज इन्हें बिखरा दिया है इसकदर तमन्ना है की आपकी पलकों पर ये सजें ************************ बड़ी शिद्दत से बिछाये बैठे थे प्यार के गलीचे को खबर क्या थी उसमें खटमल भी आ जाया करते हैं ************* आज इस बारिश की…





