तुम्हारे उठने और मेरे गिरने के बीच बहुत कम फासला था. बहुत छोटी सी थी ये जमीं या तो तुम उठ सकते थे या मै ही, मैंने उठने दिया दिया था तुम्हे अपने कंधो का सहारा देकर उसमे झुक गए मेरे कंधे आहत हुआ अंतर्मन पर ह्रदय प्रफुल्लित था आत्मा की आवाज़ सुनकर. पर आज सबकुछ नागवार सा है, भूल…
भाषा – सिर्फ शब्दों और लिपि का ताना बाना नहीं होती. भाषा सम्पूर्ण संस्कृति होती है और अपने पूरे वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है. खासकर यदि वह भाषा किसी पाठ्यक्रम में इस्तेमाल की जाए वह भी छोटे बच्चों के तो उसपर थोड़ा विचार अवश्य किया जाना चाहिए. क्योंकि प्रारंभिक शिक्षा और किताबों का उद्देश्य नौकरी दिलाना या साहित्य पढ़ाना…




