गुजर गया 2012 और कुछ ऐसा गुजरा कि आखिरी दिनों में मन भारी भारी छोड़ गया। यूँ जीवन चलता रहा , दुनिया चलती रही , खाना पीना, घूमना सब कुछ ही चलता रहा परन्तु फिर भी मन था कि किसी काम में लग नहीं रहा था . ऐसे में जब कुछ नहीं सूझता तो मैं पुस्तकालय चली जाया करती हूँ और वहां से…

ये कैसा महान देश है मेरा…. कल के कर्णधार ही जहाँ भूखे नंगे फिरते हैं भावी सूत्रधार जहाँ ढाबे पर बर्तन घिसते हैं सृजन करने वाली माँ का जहाँ आँचल सूखा रहता है और सृजन का भागीदार  नशे में डूबा रहता है ये कैसा महान देश है मेरा…. देश चलाने वाले ही जब देश को बेचा करते हैं और रखवाले…

यहाँ आजकल बर्फ पढ़ रही है तो उसे देखकर कुछ ख्याल आये ज़हन में view from my house window . छोटे छोटे रुई के से टुकड़े गिरते हैं धुंधले आकाश से और बिछ जाते हैं धरा पर सफ़ेद कोमल चादर की तरह तेरा प्यार भी तो ऐसा ही है, बरसता है बर्फ के फाहों सा और फिर …… बस जाता है…

फ़्रांस की राजधानी पेरिस – द सिटी ऑफ़ लव, भव्यता, संम्पन्नता, ग्लेमर का पथप्रदर्शक.बाकी दुनिया से अलग एक शहर, जिसकी चकाचौंध के आगे सब कुछ फीका लगता है. लन्दन आने वाले हर व्यक्ति के  मन में सबसे पहले इस फैशन  की इस राजधानी को देख लेने की इच्छा बलबती होने लगती है. लन्दन से कुल  ३४३ km  ( सड़क से ) दूर पेरिस तक जाने…

प्रेम दिवस कहो या valentine day ..कितना खुबसूरत एहसास है …आज के दौर की इस आपा धापी जिन्दगी में ये एक दिन जैसे ठहराव सा ला देता है .एक दिन के लिए जैसे फिजा ही बदली हुई सी लगती है ..फूलो की बहार सी आ जाती है…हर चेहरा फूल सा खिला दीखता है..कोई गर्व से , कोई ख़ुशी से ,…