कहने को तो ये भीड़ है सड़कों पर कदम मिलते लोगों का रेला भर पर इसी मैं छिपी है संपूर्ण जिंदगी किसी के लिए चलती तो किसी के लिए थमती किसी के लिए आगाज़ भर तो किसी को अंजाम तक पहुँचाती इस रेले मैं आज़ किसी के पेरो को लग गये हैं पंख कि नौकरी का आज़ पहला दिन है…
देवनागरी लिपि है मेरी, संस्कृत के गर्भ से आई हूँ. प्राकृत, अपभ्रंश हो कर मैं, देववाणी कहलाई हूँ. शब्दों का सागर है मुझमें, झरने का सा प्रभाव है. है माधुर्य गीतों सा भी, अखंडता का भी रुआब है. ऋषियों ने अपनाया मुझको, शास्त्रों ने मुझे संवारा है. कविता ने फिर सराहा मुझको, गीतों ने पनपाया है. हूँ गौरव आर्यों का…
अपनी सभ्यता, सुरम्यता और जीवंतता के लिए विश्व फलक पर मशहूर लंदन आने वाले पर्यटकों की संख्या किसी काल समय की मुहताज नहीं है. भारत से भी यहाँ वर्ष पर्यन्त पर्यटकों की अच्छी खासी तादाद देखी जा सकती है. हर पर्यटक का किसी स्थान के प्रति अपना नजरिया होता है तो कुछ पूर्वाग्रह भी होता होगा. ऐसे में ही कोई बाहर…


